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स्वागत तव ऋतुराज

ऋतुराज के स्वागत में पांच दोहे

स्वागत तव ऋतुराज

चंप पुष्प कटि मेखला, संग सुभग कचनार।
गेंदा बिछुआ सा फबे, गल जूही का हार।१।

.
बेला बाजूबंद सा, कंगन हरसिंगार।
गुलमोहर भर मांग में, करे सखी श्रृंगार ।२।

.
पहन चमेली मुद्रिका, नथिया सदाबहार।
गुडहल बिंदी भाल दे, मन मोहे गुलनार।३।

.
जूही गजरा केवडा, सजे सखिन के बाल।
तन मन को महका रही, मौलश्री की माल।४।

.
झुमका लटके कान में, अमलतास का आज।
इस अनुपम श्रृंगार से, स्वागत तव ऋतुराज।५।

-सत्यनारायण सिंह
(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment by गिरिराज भंडारी on February 4, 2014 at 6:19pm

आदरणीय सत्य नारायण भाई , वाह !! बहुत सुन्दर दोहा वली की रचना की है ॥ आपको हार्दिक बधाई ॥

Comment by Sarita Bhatia on February 4, 2014 at 4:55pm

वाह पुष्पांजलि को अर्पित दोहावली सुन्दर अति सुन्दर 

Comment by Meena Pathak on February 4, 2014 at 12:14pm

बहुत बहुत सुन्दर दोहे ... 

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