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उसने भुलाया हो न हो (ग़ज़ल) "राज"

२१२२  २१२२  २१२२  २१२

बारहा सजदा करेंगे खुश खुदाया हो न हो

इस अकीदत का कभी एजाज़ पाया हो न हो

 

जान रख दें उस ख़ुदा के सामने तेरे लिए  

सर किसी के सामने हमने झुकाया हो न हो

 

सींचते उसकी जड़ों को आज भी हम प्यार से

वक़्त हमने छाँव में उसकी बिताया हो न हो

 

याद में उसकी हमेशा हम लिखेंगे हर ग़ज़ल

हम भुला सकते नहीं उसने भुलाया हो न हो

 

काश जलकर  हम उजाला कर सकें उसके लिए  

दीप उसने आज घर अपने जलाया हो न हो

 

लिख दिया है नाम अपना उस समंदर के निहाँ

गेसुओं ने मौज की उसको मिटाया हो न हो

 

चाँद की महफ़िल सजी है झिलमिलाती चाँदनी   

बज्म में उसकी चलें हम को बुलाया हो न हो

 

वादिए शादाब में ढूँढे नदी  अपने निशाँ

अब्र उसकी जिंदगी में ‘राज’ आया हो न हो  

*************************************

बारहा =हमेशा, सजदा =पूजा, एजाज़=चमत्कार ,जादू

निहाँ =अन्दर, अकीदत =आस्था ,श्रद्धा, वादिए शादाब =हरी भरी वादी

अब्र =बादल

 (मौलिक एवं अप्रकाशित )

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on March 22, 2014 at 8:57pm

गज़ल पर आपकी उपस्थिति और सराहना पाकर हर्षित हूँ तहे दिल से आभार आपका आदरणीय सौरभ जी. 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on March 22, 2014 at 8:40pm

याद में उसकी हमेशा हम लिखेंगे हर ग़ज़ल

हम भुला सकते नहीं उसने भुलाया हो न हो ..   यह शेर वाकई खास है.

बधाई स्वीकार करें आदरणीया राजेश कुमारी.

सादर


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on March 4, 2014 at 8:38pm

प्रिय प्राची जी, ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और सराहना ये ग़ज़ल धन्य हुई ,तहे दिल से आभारी हूँ.सस्नेह.  


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on March 4, 2014 at 2:15pm

बहुत खूबसूरत ग़ज़ल कही है आ० राजेश जी 

हर एक शेर पर अलग-अलग ढेर सी बधाई लीजिये 

याद में उसकी हमेशा हम लिखेंगे हर ग़ज़ल

हम भुला सकते नहीं उसने भुलाया हो न हो......................बहुत सुन्दर 

शुभकामनाएं 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on February 26, 2014 at 10:00am

आ० कल्पना रमानी जी आपको ग़ज़ल ,रदीफ़ पसंद आया तो मेरी ग़ज़ल मुकम्मल हुई तहे दिल से आभारी हूँ .


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on February 26, 2014 at 9:58am

ब्रजेश जी, ग़ज़ल आपको पसंद आई मन प्रसन्न हो गया तहे दिल से आभार आपका. 

Comment by कल्पना रामानी on February 25, 2014 at 11:17pm

आद्रणीया राजेश कुमारी जी, बहुत सुंदर गज़ल हुई है आपकी। हर शे'र लाजवाब। रदीफ़ विशेष पसंद आई।

Comment by बृजेश नीरज on February 25, 2014 at 10:11pm

वाह! बहुत सुन्दर ग़ज़ल! आपको हार्दिक बधाई!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on February 24, 2014 at 12:27pm

लक्ष्मण धामी जी आपको ग़ज़ल पसंद आई मेरा लिखना सार्थक हुआ तहे दिल से आभारी हूँ .

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 24, 2014 at 12:01pm

आदरणीया राजेश जी , बहुत लाजवाब ग़ज़ल कही है l सभी शे र एक से बढ़्कर एक हैं l हार्दिक  बधाइ स्वीकार करें ॥

जान रख दें उस ख़ुदा के सामने तेरे लिए  

सर किसी के सामने हमने झुकाया हो न हो

शे'र के लिए पुनः बधाई .

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