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ग़ज़ल- रात इक जुगनू हवा में कुलबुलाता रह गया

रात इक जुगनू हवा में कुलबुलाता रह गया
रौशनी के वास्ते खुद को जलाता रह गया

पेट की मजबूरियां थीं, हम शहर में बस गए
गाँव हमको ख्वाब में वापस बुलाता रह गया

कोठियाँ बेशक मेरे बच्चों ने कर दी हैं खड़ी
पर तुम्हारी याद का उसमें अहाता रह गया

आज मुझको काम से इक रोज की फुर्सत मिली
आज दिनभर लाडला बस मुस्कुराता रह गया

धन की देवी आपके घर क्यों कभी रुकती नहीं
चौक पर बैठा नजूमी ये बताता रह गया

आँख का हर प्रश्न आंसू की सतह में बह गया
और बेटा देश से बाहर कमाता रह गया.
- अनुराग 'अनुभव' ( मौलिक)

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Comment by suvarna on April 30, 2014 at 8:27am

आँख का हर प्रश्न आंसू की सतह में बह गया
और बेटा देश से बाहर कमाता रह गया........ बहुत ख़ूब .....

Comment by savitamishra on April 17, 2014 at 7:16pm

बहुत ही सुन्दर

Comment by Anurag Singh "rishi" on April 13, 2014 at 1:18pm

 क्या खूब रचना है लाजवाब गुरुजनों के सुझावों पे ध्यान दें
शुभकामनाएं

Comment by Ajay Agyat on April 9, 2014 at 7:38pm

बहुत उम्दा 

Comment by PRAMOD SRIVASTAVA on March 28, 2014 at 11:20pm

bahut sundarAnurag ji . aap ki gajal  jhakjhor deti hai

Comment by Yamit Punetha 'Zaif' on March 28, 2014 at 3:41pm
भाई जान, बहुत ही सुन्दर लिखा है अपने। ढेरों दाद आपको।

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on March 27, 2014 at 12:05am

भाई मुकेश जी, सिर्फ़ लाता से काम नहीं चलेगा न .. कुलबुलाता और जलाता के कारण लाता किया जाय तो सिनाद दोष हावी हो जायेगा. वैसे आपने अपने ढंग से कहने की कोशिश की यह अच्छा लगा.

वैसे भाई अनुराग अनुभव बहुत अच्छी कोशिश करते हैं.

Comment by Mukesh Verma "Chiragh" on March 24, 2014 at 3:50pm

मुझसे नहीं पूछा  अiपने पर बता देता हूँ.. क़ाफियों की बुनियाद मतले मे छिपी होती है. इसके अनुसार आपको बाकी सारे क़ाफ़िए ऐसे लेने होंगे जिनके अंत में ....लाता हो..जैसे कुलबुलाता, जलाता.. आशा है आप समझ जाएँगे.

Comment by Mukesh Verma "Chiragh" on March 24, 2014 at 3:44pm

खूबसूरत ख़यालों पर दाद बनती ही है. लिखते रहिए

Comment by Anurag Anubhav on March 24, 2014 at 8:44am
केवल प्रसाद जी, गिरिराज भंडारी जी, धर्मेन्द्र सिंह जी काफिया में दोष की जो बात आपने कही मैं उस पर गौर कर रहा हूँ... मैं ग़ज़ल का बिलकुल नया विद्यार्थी हूँ अतः आप सभी से और अधिक स्पष्ट बात कहने की प्रार्थना है.. मैं समझ नहीं पा रहा काफिये का दोष...

मेरे मुताबिक अगर कुलबुलाता का प्रयोग गलत है तो क्या मुस्कुराता और बुलाता का प्रयोग भी गलत है???

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