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एक और अच्छी ग़ज़ल पढने को मिली ...
शायरी कैसे लिखें पर आपको पहले ही स्पष्ट कर चुका हूँ अगर सही न किया हो तो अवश्य कर लें
भाई अनुरागजी, एक अच्छी गजल के लिए हार्दिक बधाई.
एक बात, आपकी उपस्थिति दीर्घकालिक होनी चाहिये. अपनी ग़ज़ल पर आयी टिप्पणियों पर अपने धन्यवाद ज्ञापित नहीं किया है.
शुभेच्छाएँ.
bahut khoob bhai sahab
अद्भुत भाव....
शानदार जिंदाबाद नायाब ग़ज़ल हर शेर लाजबाब बह्र पर कसी हुई एक जगह इस्स्लाह देना चाहूंगी ---
एक पिंजराबंद पंछी को उड़ाकर देख लो-----एक पिंजर बद्ध पंछी को उड़ाकर देख लो ---करेंगे तो बह्र सही हो जायेगी
बाकी किसी अशआर में कोई कमी नहीं है
हम निहत्थे हैं मगर माँ की दुवाएँ साथ हैं
जीत किसकी, हार किसकी आज़मा कर देख लो----वाह्ह्ह्हह
माँ मुझे मालूम है हालात कुछ अच्छे नहीं
हौसला हो जायेगा गर मुस्कुरा कर देख लो----लाजबाब ,दिल छू गया ये शेर
लोग मुझसे पूछते हैं शायरी कैसे लिखें
दर्द को पन्ने पे रखकर गुनगुना कर देख लो----सुभानल्लाह
इस शानदार ग़ज़ल के लिए ढेरों दाद कबूलें अनुराग अनुभव जी
जिंदाबाद..जिंदाबाद...अनुभव भाई जिंदाबाद....
लोग मुझसे पूछते हैं शायरी कैसे लिखें
दर्द को पन्ने पे रखकर गुनगुना कर देख लो...गजल पढ़ कर मजा आ गया
हम निहत्थे हैं मगर माँ की दुआएं साथ हैं
जीत किसकी, हार किसकी आज़मा कर देख लो..... जिंदाबाद साहब !
जिंदगी कितनी हंसीं है आओ आकर देख लो
एक पिंजराबंद पंछी को उड़ाकर देख लो
तुम हमें समझा रहे हो बेवफाई का सबब?
फैसला हो जायेगा नज़रें मिलाकर देख लो
वाह वाह अदरणीय अनुराग जी, बहुत ही उम्दा गज़ल कही , भिन्न भिन्न खूबसूरत चित्र खींचें , पढ़ कर अतिप्रसन्नता हुयी बहुत बधाई आपको ......
भावनाओं की सुन्दर अभिव्यक्ति......................................
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