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दोहे गर्मी के/कल्पना रामानी

चुपके-चुपके चैत ने, घोला अपना रंग।

और बदन की स्वेद से, शुरू हो गई जंग।

 

पल-पल तपते सूर्य की, ऐसी बिछी बिसात।

हर बाज़ी वो जीतकर, हमें दे रहा मात।

 

लू लपटों ने कर लिया, दुपहर पर अधिकार।

दिन भर तनकर घूमता, दिनकर चौकीदार।

 

हरियाली गुम हो गई, प्रखर हो गई धूप।

पीत वर्ण अब हो चला, उद्यानों का रूप।  

 

व्याकुल पंछी फिर रहे, सूखे कंठ उदास,

जाएँ कहाँ निरीह ये, बुझे किस तरह प्यास।

 

तरण ताल सूखे सभी, बालक हैं गमगीन।

वन जीवन प्यासा फिरे, जल बिन तड़पी मीन।

 

नमी हवा खोने लगी, मुरझाए तृण पात।

रातों की ठंडक घटी, गुमी शबनमी प्रात।

 

बात “कल्पना” मानिये, सेहत रखें बहाल,

सुबह-शाम  टहला करें, दिन बीते खुशहाल।

मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by कल्पना रामानी on April 1, 2014 at 7:35pm

आ॰ प्राची जी आपकी साराहना से मन प्रफुल्लित हुआ। आपका मन से  धन्यवाद

Comment by कल्पना रामानी on April 1, 2014 at 7:33pm

आदरणीय सौरभ जी, यहाँ तो गर्मी बहुत तेज़ हो गई है, और कुछ भाव बनते ही नहीं, वहाँ शायद कुछ देर से मौसम बदलता होगा। आपको दोहे पसंद आए, संतोष हुआ। आपका हार्दिक धन्यवाद


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on April 1, 2014 at 6:37pm

ग्रीष्म ऋतु पर बहुत सुन्दर दोहावली प्रस्तुत की है आ० कल्पना जी 

बहुत बहुत बधाई


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on March 28, 2014 at 2:19am

वाह !! ग्रीष्म का वातावरण ही नहीं तारी हुआ. पूरी ऋतु आ गयी. बहुत अच्छे दोहों के लिए हार्दिक बधाइयाँ आदरणीया कल्पनाजी.

हार्दिक शुभकामनाएँ.

Comment by कल्पना रामानी on March 25, 2014 at 9:52pm

प्रिय कल्पना जी, सरिता जी आपका बहुत बहुत धन्यवाद

Comment by कल्पना रामानी on March 25, 2014 at 9:51pm

आदरणीया कुंती जी, आपको रचना पर देखकर सुखद अहसास हुआ।  परिवार के साथ तो वैसे भी मौसम कोई भी हो अच्छा ही बीतता  है,

फिर गर्मी क्यों न सुखकर होगी/सादर  

 

Comment by कल्पना रामानी on March 25, 2014 at 9:47pm

आदरणीया  राजेश जी, आपको दोहे पसंद आए, मन प्रफुल्लित हुआ। आपका मन से धन्यवाद  

Comment by कल्पना रामानी on March 25, 2014 at 9:45pm

आदरणीय प्रदीप जी, सादर धन्यवाद

Comment by कल्पना रामानी on March 25, 2014 at 9:44pm

आदरणीय गणेश जी, रचना पर आपकी उपस्थिति से मन हर्षित हुआ। दोहों की प्रशंसात्मक टिप्पणी द्वारा प्रोत्साहित करने के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद।

Comment by Sarita Bhatia on March 24, 2014 at 10:12am

दी खुबसूरत दोहों के साथ गर्मी का स्वागत ,बधाई आपको 

पर मौसम अजब गजब है 

इसी पर पढ़िए मेरी अगली पोस्ट 

कृपया ध्यान दे...

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