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बेटियों आगे बढ़ो/ग़ज़ल/कल्पना रामानी

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सीख लो अधिकार पाना, बेटियों आगे बढ़ो।

स्वप्न पूरे कर दिखाना, बेटियों आगे बढ़ो।

 

चाहे मावस रात हो, जुगनू सितारे हों न हों,

ज्योत बनकर जगमगाना, बेटियों आगे बढ़ो।

 

सिर तुम्हारा ना झुके, अन्याय के आगे कभी,

न्याय का डंका बजाना, बेटियों आगे बढ़ो।

 

ज्ञान के विस्तृत फ़लक पर, करके अपने दस्तखत,

विश्व में सम्मान पाना, बेटियों आगे बढ़ो।

 

तुम सबल हो,  बाँध लो यह बात अपनी गाँठ में,

क्यों सुनो अबला का ताना, बेटियों आगे बढ़ो।

 

रूढ़ियों की रीढ़ तोड़ो, बेड़ियाँ सब काट कर,

दिलजलों के  बुत जलाना, बेटियों आगे बढ़ो।

 

भागने देखो न पाएँ, नाग जो तुमको डसें,

फन कुचल उनके दिखाना, बेटियों आगे बढ़ो।

 

सीख लो गुर निज सुरक्षा के सदा रहना सजग,

है बड़ा ज़ालिम ज़माना, बेटियों आगे बढ़ो।

     

 गर्भ में ही फिर तुम्हारा, अंश ना हो अस्तमित,

'कल्पना' खुद को बचाना, बेटियों आगे बढ़ो।  

मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by कल्पना रामानी on April 11, 2014 at 6:23pm

हार्दिक धन्यवाद अन्नपूर्णा जी

Comment by annapurna bajpai on April 10, 2014 at 10:20pm

सुंदर गजल आ0 कल्पना दीदी । 

Comment by कल्पना रामानी on April 3, 2014 at 9:46pm

सादर धन्यवाद आदरणीय सौरभ जी


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on April 3, 2014 at 3:20am

ऊर्जस्वी प्रस्तुति के लिए हार्दिक धन्यवाद एवं शुभकामनाएँ, आदरणीया कल्पनाजी.

Comment by कल्पना रामानी on March 27, 2014 at 10:14pm

आ॰ मुकेश जी, आ॰ लक्ष्मण जी, आ॰ अभिनव अरुण जी, आ॰ अखिलेशजी, आ॰ अरुण अनंत जी, आ॰ विजय जी,आ॰  सचिन देव जी आ॰ आशुतोष मिश्राजी , आ॰ शिज्जु जी, आप सबका आत्मीय टिप्पणी द्वारा रचना की सराहना के लिए हार्दिक आभार

Comment by अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव on March 27, 2014 at 2:21pm

आदरणीया कल्पना जी

बेटियों में जोश भरती , उन्हें सजग करती इस सुंदर रचना के लिए हार्दिक बधाई, सच कहा है, जमाना बहुत खराब है।

Comment by अरुन 'अनन्त' on March 27, 2014 at 2:10pm

वाह आदरणीया वाह साधुवाद बहुत ही सशक्त ओजपूर्ण सुन्दर संदेशात्मक ग़ज़ल सभी के सभी अशआर सीधे दिल को छू गए दिल से बधाई स्वीकारें.

Comment by विजय मिश्र on March 26, 2014 at 5:00pm
यह तो एक सुंदर जागरण गीत है जो अतिसामयिक सन्देश का संचलन करता है |आदर कल्पना दीदी |
Comment by Sachin Dev on March 26, 2014 at 3:04pm

आदरणीय कल्पना जी, बेटियों को आन्दोलित करती आगे बढ़ने का आह्वान करती बेहद ओजस्वी रचना पर आपको हार्दिक बधाई ! 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on March 25, 2014 at 5:54pm

बहुत ही खूबसूरत रचना ..आज के सन्दर्भ में यह रचना एक मशाल की तरह है ...बेटियों को नूतन पथ प्रशस्त करती इस शानर रचना के लिए तहे दिल बधाई सादर

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