For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

नवगीत--झील चुप सी.......!

झील चुप सी राह तकती,
नाव डगमग
भाव भर कर
राज सारे पूछती है।

रेत फिसली
तट सॅवर कर,
हाथ पल पल
धो रही नित,
मल घुला जल
विष भरे तन
मीन प्यासी कोसती है।।1


सूर्य किरनों से
पिए नित रक्त
नदियों के बदन का,
धर्म की
पतवार भी अब
तीर सम तन छेदती है।।2


वन-सरोवर
तन उचट कर
छॉंव गिर कर
दूर जाती।
प्रेम का
सम्बन्ध रचकर
सांझ तक मन सोखती हैं।।3


रात सज कर
जब मचलती,
दौर पर तब
दौर चलते
घूस-बलवा
तेल पीकर,
दीप की लौ झूमती है।।4


सिर चढ़ी मय
जिद करे अब
मन उमंगे
वाह! करती
नाचते दंगें
उछल कर
आह! भरती चॉंदनी है।5

के0पी0सत्यम-मौलिक व अप्रकाशित

Views: 639

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on April 3, 2014 at 7:38pm

आ0  आशीष भाई जी, सादर प्रणाम!  नवगीत पर आपके स्नेह और उत्साहवर्धन हेतु आपका तहेदिल से बहुत-बहुत आभार।  सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on April 3, 2014 at 7:37pm

आ0 महिमा श्री  जी, सादर प्रणाम!  नवगीत पर आपके स्नेह और उत्साहवर्धन हेतु आपका तहेदिल से बहुत-बहुत आभार।  सादर,

Comment by आशीष नैथानी 'सलिल' on April 2, 2014 at 11:19pm

रात सज कर
जब मचलती,
दौर पर तब
दौर चलते
घूस-बलवा
तेल पीकर,
दीप की लौ झूमती है। 

सुन्दर नवगीत भाई !!

Comment by MAHIMA SHREE on April 2, 2014 at 10:07pm

आदरणीय केवल जी बेहद सुंदर भावयुक्त नवगीत हार्दिक बधाई आपको सादर

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on April 2, 2014 at 8:08pm

आ0  विजय भाई जी,    नवगीत के प्रति स्नेह और सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार।    सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on April 2, 2014 at 8:06pm

आ0  विन्ध्येश्वरी भाई जी,   आपके स्नेह और सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार।    सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on April 2, 2014 at 8:05pm

आ0 आशुतोष  भाई जी, आपका नवगीत के प्रति लगाव को देख कर मुझे बड़ी खुशी मिली।  आपके स्नेह और सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार।  भाई जी-  नवगीत पर आ0 डा0 प्राची सिंह जी के लेख नवगीत की विधा पर काफी चर्चा इसी ओ बाी ओ के पटल पर हो चुका है।  जिसे मैं खोज नहीं पाया।  कृपया आप आदरणीया जी अथवा आ0 सौरभ सर जी से नवगीत का लिंक पूॅंछ लीजिए,। आपको तत्काल उपलब्ध हो जाएगा।  सादर,

Comment by विजय मिश्र on April 2, 2014 at 2:32pm
आनन्द उमग पड़ा | सुमधुर प्रवाह लिए एक प्रशंसनीय रचना |बधाई केवल भाई |
Comment by विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी on April 2, 2014 at 9:45am
भाई केवल प्रसाद जी! बहुत ही सुन्दर नवगीत रचा है आपने। बधाई
Comment by Dr Ashutosh Mishra on April 1, 2014 at 5:57pm

आदरणीय केवल जी ..बहुत ही मधुर नवगीत ..गुन्गुनानते हुए बेहद आनंद आया ..मेरी तरफ से हार्दिक बधाई स्वीकार करें .सादर  एक निवेदन भी कर रहा हूँ नव गीत के बिषय में बिस्तार से जान्ने के लिए कोई लिंक हो देने का कष्ट कीजियेगा ..

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
23 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"वायव्य दशा के प्रस्तुतीकरण के क्रम में बना विश्वास प्रस्तुति की शाब्दिकता को स्थापित करता हुआ सफल…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"संसार का मंच एक गंभीर विषय है. तदनुरूप आपका प्रयास श्लाघनीय है, आदरणीय सुशील सरना जी.  कई…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा…"
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"आदरणीय  अशोक रक्ताले जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय…"
yesterday
Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"चुप रहिए...  वाह  क्या रदीफ़ है, इसे देखकर ही मैं हाज़िर हो गया.  रहना हो भारत में…"
Sunday
Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"अभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।.....सच है अभिनय जीवन की…"
Sunday
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

बरसात

बरसात घन गरजे अंधियारी छाई,बिजली अम्बर पर इठलाई  बूँदें टपकी टप-टप भाईरिमझिम रिमझिम बारिश आई पत्ते…See More
Jul 5
vijay nikore replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"Dear respected Admin team: A few minutes ago, I typed my suggestion, but lost it all before it was…"
Jul 5
vijay nikore replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"..."
Jul 5
Chetan Prakash replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  आदरणीय,  तकनीकी दृष्टिकोण से मैं कुछ  अधिक नहीं कह सकता । किन्तु यदि हमारा …"
Jun 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी विद्वद्जन अपने-अपने हिसाब कुछ न कुछ चर्चा कर रहे हैं, उपाय बता रहे हैं, आदरणीय ..  आप भी…"
Jun 12

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service