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उद्घोष

(ओ.बी.ओ. की चौथी वर्षगाँठ पर ओ.बी.ओ. परिवार के सभी का अभिनंदन करते हुए)

 

गली-गली पवन चली, किलक उठी कली-कली,
महक उठे पराग बिंद, थिरक उठे अलि-अलि.

 

जाग उठा तमाल वन, जाग उठा है हर चमन,
किसी के आगमन के साथ, जाग उठा है हर सपन.

उम‌ड़ रहे जलद दल, घुमड़ रहे वे हो विकल,
कर रहे उद्घोष सब, ये किसी का जन्म पल.

(मौलिक व अप्रकाशित रचना)

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on April 15, 2014 at 10:59pm

वाह वाह !  यानि, समस्त प्रकृति में प्रसन्नता व्यापी दिखी.

आपको भी सादर बधाइयाँ.


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on April 4, 2014 at 7:11pm

सम्पूर्ण प्रकृति अपनी पूर्ण सुन्दरता और उत्साह के साथ इस पावन जन्मपल पर उत्साहित आनंदित सी प्रतीत हुई... आपकी इस भाव प्रस्तुति पर विनम्र भाव से शुभकामनाएं 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by sharadindu mukerji on April 3, 2014 at 10:30pm
आदरणीय लाडीवाला जी, हार्दिक आभार.

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by sharadindu mukerji on April 3, 2014 at 10:29pm
आदरणीया गीतिका जी, हार्दिक आभार. बहुत...बहुत दिनों बाद आपको पुन: इस मंच पर सक्रिय देखकर अपार हर्ष हो रहा है. सादर.
Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on April 2, 2014 at 8:02pm

ओबीओ के अभिनन्दन में प्रस्तुत अभिव्यक्ति के लिए बधाई -

ओबीओ परिवार में, है खुशियों का राज

ई-पत्रक में मंच पर, ओ बी ओ सरताज | 

Comment by वेदिका on April 2, 2014 at 6:01pm
सुन्दर स्वागत वंदन कविता
सादर वेदिका

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