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पंछी उदास हैं/नवगीत/कल्पना रामानी

गाँवों के पंछी उदास हैं

देख-देख सन्नाटा भारी।

 

जब से नई हवा ने अपना,

रुख मोड़ा शहरों की ओर।

बंद किवाड़ों से टकराकर,

वापस जाती है हर भोर।

 

नहीं बुलाते चुग्गा लेकर,

अब उनको मुंडेर, अटारी।

 

हर आँगन के हरे पेड़ पर,

पतझड़ बैठा डेरा डाल।

भीत हो रहा तुलसी चौरा,

देख सन्निकट अपना काल।

 

बदल रहा है अब तो हर घर,

वृद्धाश्रम में बारी-बारी।

 

बतियाते दिन मूक खड़े हैं।

फीकी हुई सुरमई शाम।

घूम-घूम कर ऋतु बसंत की,

हो निराश जाती निज धाम।

 

गाँवों के सुख राख़ कर गई,

शहरों की जगमग चिंगारी। 

मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by कल्पना रामानी on May 3, 2014 at 9:17pm

आदरणीया प्राची जी, रचना पर आपकी उपस्थिति से  उत्साह और बढ़ जाता है। प्रोत्साहित करने के लिए हार्दिक आभार

Comment by कल्पना रामानी on May 3, 2014 at 9:15pm

आदरणीय सौरभ जी, आपने गीत के मर्म को समझा, बहुत खुशी हुई। इस गीत कि रचना ही इन्हीं भावों को शब्द देने के प्रयास के कारण हुई है। आपकी सूक्ष्म दृष्टि की तो मैं हमेशा से कायल हूँ। आपका बहुत बहुत धन्यवाद

Comment by कल्पना रामानी on May 3, 2014 at 9:13pm

आदरणीय सत्यनारायन सिंह जी, सादर धन्यवाद

Comment by कल्पना रामानी on May 3, 2014 at 9:11pm

आदरणीया विंदु जी, प्रोत्साहित करती हुई टिप्पणी के लिए बहुत बहुत धन्यवाद आपका

Comment by कल्पना रामानी on May 3, 2014 at 9:10pm

प्रिय  महिमा जी, स्नेहपूर्ण सुंदर टिप्पणी के लिए हार्दिक धन्यवाद

Comment by कल्पना रामानी on May 3, 2014 at 9:08pm

आदरणीय विजय जी, रचना कि सराहना के लिए  सादर धन्यवाद


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on May 2, 2014 at 9:00am

सुन्दर नवगीत प्रस्तुत हुआ है आ० कल्पना रामानी जी 

हार्दिक बधाई 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on May 2, 2014 at 2:28am

हर आँगन के हरे पेड़ पर,

पतझड़ बैठा डेरा डाल।

भीत हो रहा तुलसी चौरा,

देख सन्निकट अपना काल।

 

बदल रहा है अब तो हर घर,

वृद्धाश्रम में बारी-बारी।

गीत की सार्थकता कथ्य से निस्सृत है, आदरणीया कल्पनाजी. आपकी संवेदना को नमन..

Comment by Satyanarayan Singh on May 1, 2014 at 11:24am

नवगीत बहुत ही सुन्दर है. इस उत्तम नवगीत के लिए आदरणीया कल्पना जी आपको ढेरों हार्दिक बधाई

Comment by Vindu Babu on April 26, 2014 at 11:07pm

अरे वाह आदरणीया!

बिलकुल यथार्थ और सटीक अभिव्यक्ति की है।

आपको हार्दिक बधाई और समाज के लिए शुभकामनायें।

सादर

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