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बेटियाँ होंगी न जब /गजल/कल्पना रामानी

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गर्भ में ही निज सुता की, काटकर तुम नाल माँ!

दुग्ध-भीगा शुभ्र आँचल, मत करो यूँ लाल माँ!

 

तुम दया, ममता की देवी, तुम दुआ संतान की,

जन्म दो जननी! न बनना, ढोंगियों की ढाल माँ!

 

मैं तो हूँ बुलबुल तुम्हारे, प्रेम के ही बाग की,

चाहती हूँ एक छोटी सी सुरक्षित डाल माँ!

 

पुत्र की चाहत में तुम अपमान निज करती हो क्यों?

धारिणी, जागो! समझ लो भेड़ियों की चाल माँ!

 

सिर उठाएँ जो असुर, उनको सिखाना वो सबक,

भूल जाएँ कंस कातिल, आसुरी सुर ताल माँ!

 

तुम सबल हो, आज यह साबित करो नव-शक्ति बन,

कर न पाएँ कापुरुष, ज्यों मेरा बाँका बाल माँ!

 

ठान लेना जीतनी है, जंग ये हर हाल में,         

खंग बनकर काट देना, हार का हर जाल माँ!

 

तान चलना माथ, नन्हाँ हाथ मेरा थामकर,

दर्प से दमका करे ज्यों, भारती का भाल माँ!

 

“कल्पना” अंजाम सोचो, बेटियाँ होंगी न जब,

रूप कितना सृष्टि का, हो जाएगा विकराल माँ!

मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by कल्पना रामानी on April 24, 2014 at 11:13pm

आदरणीया प्राची जी, आपकी प्रशंसा पाना मेरे लिए पुरस्कार जैसा है। बहुत बहुत धन्यवाद आपका

Comment by कल्पना रामानी on April 24, 2014 at 11:11pm

आदरणीय रमेश जी, प्रोत्साहित करने के लिए हार्दिक धन्यवाद

Comment by कल्पना रामानी on April 24, 2014 at 11:11pm

आदरणीय भुवन जी, सराहना भरे शब्दों के लिए आपका हार्दिक आभार

Comment by कल्पना रामानी on April 24, 2014 at 11:09pm

प्रिय बृजेश जी, रचना पर आपकी उपस्थिति  से अपार हर्ष हुआ। आपका हृदय से धन्यवाद


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on April 23, 2014 at 11:15pm

आदरणीया कल्पना जी 

आपकी इस ग़ज़ल की जितनी भी तारीफ़ करूँ कम ही होगी... 

हर कहन जिस संवेदना के साथ शेर में ढला है...बस झकझोर दिया 

बहुत खूबसूरत ..लाजवाब 

Comment by रमेश कुमार चौहान on April 19, 2014 at 11:00am

अहह अति सुंदर मन मुग्ध हो गया भाव एंव शब्द दोनो अतुल्य । बारबार पढ़ने का मन कर रहा है । कोटिस बधाई आदरणीया

Comment by भुवन निस्तेज on April 18, 2014 at 10:59pm

लाजवाब..आदरणीया कृपया बधाई स्वीकारें ...

Comment by बृजेश नीरज on April 18, 2014 at 9:13am

वाह! वाह! बहुत ही सुंदरा ग़ज़ल!

विषय को जिस आक्रमकता के साथ आपने प्रस्तुत किया है, वह समय की मांग भी है और आवश्यक भी है!

इस लाजवाब ग़ज़ल के लिए आपको बहुत-बहुत बधाई!

Comment by कल्पना रामानी on April 17, 2014 at 8:14pm

आदरणीय गिरिराज जी, आत्मीय टिप्पणी के लिए मन से आभार

Comment by कल्पना रामानी on April 17, 2014 at 8:13pm

आदरणीय धर्मेन्द्र आपकी प्रशंसा पाकर बहुत हर्ष हुआ। सादर धन्यवाद

कृपया ध्यान दे...

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