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नैन समर्पण ....

नैन कटीले होठ रसीले
बाला ज्यों मधुशाला
कुंतल करें किलोल कपोल पर
लज्जित प्याले की हाला
अवगुंठन में गौर वर्ण से
तृषा चैन न पाये
चंचल पायल की रुनझुन से मन
भ्रमर हुआ मतवाला
प्रणय स्वरों की मौन अभिव्यक्ति
एकांत में करे उजाला
मधु पलों में नैन समर्पण
करें प्रेम श्रृंगार निराला

सुशील सरना

मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 607

Comment

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Comment by Sushil Sarna on May 9, 2014 at 7:17pm

रचना पर आपकी स्नेहिल प्रशंसा का हार्दिक आभार आदरणीया मीना पाठक जी 

Comment by Sushil Sarna on May 9, 2014 at 7:16pm

रचना पर आपकी स्नेहिल प्रशंसा का हार्दिक आभार आदरणीय शिज्जू शकूर जी 

Comment by Meena Pathak on May 8, 2014 at 7:23pm

श्रृंगार रस में डूबी बहुत ही सुन्दर रचना .. बधाई आदरणीय | सादर 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on May 7, 2014 at 9:33pm

वाह बहुत खूब आदरणीय सुशील सर बहुत बहुत बधाई आपको

Comment by Sushil Sarna on May 7, 2014 at 8:15pm

आदरणीया कुंती मुख़र्जी  जी रचना पर आपके स्नेह  का हार्दिक आभार 

Comment by coontee mukerji on May 7, 2014 at 6:05pm

श्रृगार रस में यह सुंदर रचना है...आपको हार्दिक बधाई.

Comment by Sushil Sarna on May 7, 2014 at 1:50pm

आदरणीय श्याम नारायण जी रचना पर आपके मधुर प्रशंसा का हार्दिक आभार 

Comment by Shyam Narain Verma on May 7, 2014 at 10:29am
अच्छी प्रस्तुति आदरणीय ,बधाई 

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