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नेट पे होती है बाते ,

नेट पे होती है बाते ,
फिर होती है मुलाकाते ,
यारो दिल की सुनो ,
कहता हु दोस्ती के नाते,
ये तो सुनहरा मौका ,
देता हैं (ओ बी ओ )
प्यार से मिलो और ,
प्यार में ही जिओ ,
गुरु के संग गणेश जी ,
और सतीश जी ,
पावन स्थल पटना,
मंदिर महाबीर की ,
तीनो जो हम मिले ,
दोस्ती दिल के खिले ,
लगता नहीं था यारो ,
पहली बार हम मिले ,
बरसो की दोस्ती हो ,
हो बरसो से मिलते रहे ,
दिल में बहुत हैं बाते ,
और मैं क्या कहू ,
जिस दिन होगी मुलाकाते ,
ओ दिन तो मैं गिनू ,
नेट पे होती है बाते ,
फिर कब होगी मुलाकाते ,

Views: 419

Comment

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Comment by Sanjay Kumar Singh on June 5, 2010 at 3:52pm
Bahut hi achhi shuruwat, ab to har shahar mey aisi milan hoti raheygi,
Comment by PREETAM TIWARY(PREET) on June 3, 2010 at 10:42pm
waah guru jee waah......mujhe bahut afsos hai ki maine ye suhana din miss kar diya......
koi baat nahi agli baar main bhi rahunga....is baar ke liye ke main aap sabhi se maafi chahta hoon ki main nahi tha....

waise ye meet yaadgaar rahegi hamesha hamare dilon me.....

jai ho obo
Comment by Admin on June 3, 2010 at 4:18pm
वाह गुरु जी वाह , एक पवित्र रिश्ते की शुरुवात , एक पवित्र मंदिर का प्रांगन और दिल मे लिये हुवे एक पवित्र उद्देश्य , क्या बात है, ये तो बस एक सुरुवात है, तीन से शुरू यह सिलसिला जल्द ही तीनसौ, तीन हजार और फिर तीन लाख से भी ज्यादा, बस सोच अच्छी हो तो सब कुछ अच्छा ही होता है, जय हो ......
बहुत ही बढ़िया कविता , धन्यबाद ,
Comment by satish mapatpuri on June 3, 2010 at 4:12pm
गुरु के संग गणेश जी ,
और सतीश जी ,
पावन स्थल पटना,
मंदिर महाबीर की ,
तीनो जो हम मिले ,
दोस्ती दिल के खिले ,
लगता नहीं था यारो ,
पहली बार हम मिले ,
जय हो गुरु जी , अगली मुलाक़ात का इंतज़ार है.
Comment by Rash Bihari Ravi on June 3, 2010 at 4:11pm

Comment by Rash Bihari Ravi on June 3, 2010 at 4:07pm

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