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माँ
मान भरे ममता का आँचल
तो पिता
सर पर नीलाभ आसमान है
दोनों का स्नेह एक सामान है.
माँ
बच्चों के दर्द से बिलबिला जाती है
तो पिता की चिंता
दर्द की दवा बन जाती है.
माँ कोमलता से भरी है
तो पिता के परुष से
विपत्तियाँ भी डरी है.
बच्चों के लिए
दोनों का स्नेह ही
वेदना -निग्रही है.

डॉ.विजय प्रकाश शर्मा
(मौलिक और अप्रकाशित)

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Comment by Dr.Vijay Prakash Sharma on June 25, 2014 at 3:54pm

आ० प्राची सिंह जी,
हमारी संस्कृति में ऐसा बराबरी का प्रचलन हमेशा रहा है-यथा:सीता-राम,राधा-कृष्णा,गुरू--शिष्यऔर माता-पिता भी.
आप ने सराहा,अच्छा लगा,धन्यवाद सह आभार.


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on June 25, 2014 at 3:44pm

पिता और माँ दोनों की ही चेतना के आवरण में बच्चे का जीवन पनपता है..दोनों की अपनी विशिष्टताएं है..ऊर्जस्विता है 

उन्हें अभिव्यक्त करती ईस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकारिये आदरणीय विजय प्रकाश शर्मा जी 

Comment by Dr.Vijay Prakash Sharma on June 19, 2014 at 9:56am

धन्यवाद रमेश जी.

Comment by रमेश कुमार चौहान on June 18, 2014 at 9:55pm

बच्चों के लिये मां बाप दोनो की महत्ता को निरूपित करते इस रचना के लिये बधाई

Comment by Dr.Vijay Prakash Sharma on June 18, 2014 at 11:03am

आभार जीतेन्द्र जी

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on June 18, 2014 at 10:40am

सच! बच्चों में जीवन के अनुभव व् संघर्ष के लिए माता-पिता दोनों का होना बहुत जरुरी है. बहुत बहुत बधाई आदरणीय विजय जी

Comment by Dr.Vijay Prakash Sharma on June 17, 2014 at 10:26pm

उत्साह वर्धन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद डॉ.विजय शंकर जी.

Comment by Dr. Vijai Shanker on June 17, 2014 at 8:45pm
बहुत सुन्दर ,
" माँ कोमलता से भरी है
तो पिता के पौरुष से
विपत्तियाँ भी डरी है."
बधाई.
सादर.
Comment by Dr.Vijay Prakash Sharma on June 17, 2014 at 5:57pm

डॉ गोपाल नारायन जी,
रचना के भावो से आपकी सहमति के लिए धन्यवाद.
आपके आशीष से ऊर्जा मिलती है.

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on June 17, 2014 at 1:11pm

विजय जी

सचमुच पिता भीकुछ कम उत्सर्ग नहीं करता i

सतांन  के लिए दोनों ही वेदना निग्रह रस है i

कृपया ध्यान दे...

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