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अपनी हर सांस में …

अपनी हर सांस में …

अपनी हर सांस में...तुझे करीब पाता हूँ
तुझे हर ख्याल में अपना हबीब पाता हूँ

बिन तेरे ज़िंदगी की हर मसर्रत है झूठी
राहे वफ़ा में तुझे अपना नसीब पाता हूँ

तुम्हारे वाद-ए-फ़र्दा पर ..यकीं करूँ कैसे
हर दीद में इक तिश्नगी ..अजीब पाता हूँ

कूए कातिल से गुजरना ..आदत है मेरी
अपने ज़ख्मों में .अपना अज़ीज़ पाता हूँ

रूए-ज़ेबा को भला ज़हन से भुलाऊँ कैसे
बिन तुम्हारे तो मैं खुद को गरीब पाता हूँ

(मसर्रत = खुशी ,वाद-ऐ-फ़र्दा = कल आने का वादा ,
कूए कातिल = कातिल की गली ,रूए ज़ेबा =सुंदर चेहरा )

सुशील सरना

मौलिक एवं अप्रकाशित 

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Comment by Meena Pathak on June 18, 2014 at 4:18pm

बहुत खूब .. ढेरों बधाई | सादर 

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on June 18, 2014 at 12:38pm

तुम्हारे वाद-ए-फ़र्दा पर ..यकीं करूँ कैसे
हर दीद में इक तिश्नगी ..अजीब पाता हूँ

कूए कातिल से गुजरना ..आदत है मेरी
अपने ज़ख्मों में .अपना अज़ीज़ पाता हूँ.............दिल को छू जाते भाव, बहुत बहुत बधाई आपको आदरणीय शुशील जी

Comment by Sushil Sarna on June 18, 2014 at 11:34am

आदरणीया गीतिका 'वेदिका' जी  रचना पर आपकी स्नेहिल प्रशंसा और अमूल्य सुझाव का हार्दिक आभार। कोशिश करूंगा आपके सुझाव को कार्यरूप में परिणित कर सकूँ।    

Comment by Sushil Sarna on June 18, 2014 at 11:32am

आदरणीया राजेश कुमारी  जी रचना पर आपकी स्नेहिल प्रशंसा का हार्दिक आभार

Comment by Sushil Sarna on June 18, 2014 at 11:31am

परम आदरणीय डॉ गोपाल नरायन श्रीवास्तव जी रचना पर आपकी नज़रे इनायत ने एक ऊंचाई प्रदान की है … आपके इस स्नेह का हार्दिक आभार

Comment by वेदिका on June 18, 2014 at 12:53am

एक खूबसूरत गज़लनुमा ख्याल आ० सुशील जी!

समय देके इसे बहर के अनुशासन पर एक खूबसूरत गज़ल का रूप भी दिया जा सकता है

बहरहाल बधाई स्वीकारें आदरणीय सुशील जी!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on June 17, 2014 at 9:01pm

सुन्दर अभिव्यक्ति .....बधाई आपको आ० सुशील सरना जी |

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on June 17, 2014 at 8:35pm

सरना जी

बड़ी  ही नायाब गजल है  i हर शेर हमला करता है i  हम घायल होते जाते है i  आपको बधाई i

Comment by Sushil Sarna on June 17, 2014 at 7:44pm

आदरणीय शिज्जु शकूर साहिब रचना पर आपकी मधुर प्रतिक्रिया का तहे दिल से शुक्रिया 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on June 17, 2014 at 6:18pm

बहुत खूब सर अच्छी कविता है

कृपया ध्यान दे...

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