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ग़ज़ल - कोई कश्ती नदी में ज्यूँ रवाँ है ( गिरिराज भंडारी )

1222      1222      122

कोई खामोश, मेरा हम ज़बाँ है

बड़ी चुप सी ,मेरी हर दास्ताँ है

 

कोई अब साथ आये या न आये

अकेलेपन से मेरा कारवाँ है

 

कहीं है आदमी में उस्तवारी    

कहीं हर शख़्स लगता नातवाँ है 

 

ये मीठी झिड़कियाँ ज़ारी हैं जब तक

तभी तक कोई रिश्ता दरमियाँ है

 

यहाँ कब ज़िन्दगी हरदम है जीती

यहाँ तो मौत ही बस जाविदाँ है

 

दिया बाती कहीं से खोज लाओ

उजाला चंद पल का मेहमाँ है

 

ज़मी से दूब सा रिश्ता हमारा

हुआ क्या? अब ज़मीं से आसमाँ है 

 

तेरी यादों की ठंडक से लगा यूँ

कोई कश्ती नदी में ज्यूँ रवाँ है 

*********************************** 

उस्तवारी = मज़बूती , नातवाँ = कमज़ोर , जाविदाँ = अमर

मौलिक एवँ अप्रकाशित 

 

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Comment

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 7, 2014 at 12:56am

वाह ! एक बार फिर से मुग्ध किया आपने आदरणीय.

इन शेरो को बार-बार सुनना चाहूँगा -

कोई अब साथ आये या न आये

अकेलेपन से मेरा कारवाँ है

ये मीठी झिड़कियाँ ज़ारी हैं जब तक

तभी तक कोई रिश्ता दरमियाँ है.. . .

कमाल ! कमाल !!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 26, 2014 at 7:24pm

आदरणीया प्राची की , आपकी सराहना ने मेरा हौसला और भी बढ़ा दिया है , ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति के लिये आपका हार्दिक आभार।


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on June 26, 2014 at 7:12pm

आदरणीय गिरिराज भंडारी जी 

आपकी ग़ज़ल का हर शेर ज़िंदगी को बहुत करीब से महसूस करता हुआ है..हर शेर दिल के करीब लगा 

कोई अब साथ आये या न आये

अकेलेपन से मेरा कारवाँ है.................वाह !

ये मीठी झिड़कियाँ ज़ारी हैं जब तक

तभी तक कोई रिश्ता दरमियाँ है...........ये भी बहुत सुन्दर 

तेरी यादों की ठंडक से लगा यूँ

कोई कश्ती नदी में ज्यूँ रवाँ है .................बहुत खूबसूरत 

मेरी हार्दिक बधाई लीजिये 

सादर.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 24, 2014 at 6:52pm

आदरणीय बड़े भाई , हौसला अफज़ाई के लिये आपका तहे दिल से शुक्रिया ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 24, 2014 at 6:51pm

आदरणीय गुमनाम भाई , गज़ल की सराहना के लिये आपका बहुत शुक्रिया ॥

Comment by vijay nikore on June 24, 2014 at 5:46pm

शूरू से अंत तक सारे भाव प्रभावमय हैं। हार्दिक बधाई, आदरणीय भाई गिरिराज जी।

Comment by gumnaam pithoragarhi on June 22, 2014 at 10:18pm

बहुत सुन्दर रचना................बहुत बहुत बधाई .


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 22, 2014 at 7:10pm

आदरणीय बड़े भाई गोपाल जी , आपकी स्नेहसिक्त प्रतिक्रिया के लिये, सराहना के लिये  आपका हार्दिक आभार ॥


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 22, 2014 at 7:08pm

आदरणीय जितेन्द्र गीत भाई , गज़ल की सराहना और उत्साह वर्धन के लिये आपका आभारी हूँ ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 22, 2014 at 7:07pm

आदरणीय शिज्जू भाई , हौसला अफज़ाई के लिये तहे दिल से शुक्रिया ॥

कृपया ध्यान दे...

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