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एक गीत अनोखा लायी हूँ...

 

HIV POSITVE KIDS 

 

जब जी चाहे तब गा लेना ,एक गीत अनोखा  लायी हूँ..

हर भाव को क्षण में जी लेना ,संगीत अनोखा लायी हूँ..
जो पीर से व्याकुल कर देगा वो दर्द अनोखा लायी हूँ..
जो नीर से आँखें भर देगा वो सत्य अनोखा लायी हूँ..

एक बाल सुलभ मुस्कान कहीं क्षण में न ओझल हो जाए ...
नन्हे हाथों से खिचे चित्र में भयावह सत्य न आजाए..
ओझल न दृष्टि से हो नन्हा वो, वर्तमान अनोखा लायी हूँ..
अपने ही बड़ों का ढ़ोते  श्राप ,भविष्य अनोखा लायी हूँ..
जो नीर से आँखें भर देगा वो सत्य  अनोखा लायी हूँ..
.
हर वक़्त दर्द का रोना रो ,हम सहानुभूति चाहते हैं..
जीवन सत्य का दर्शन कितनी गंभीरता से बतलाते हैं..
अपने ही काले सत्य को ढंकें उनका ब्योरा अनोखा लायी हूँ.
जिसने न जीवन मुख देखा ,बचपन वो अनोखा लायी हूँ..
जो पीर से व्याकुल कर देगा वो दर्द अनोखा लायी हूँ.
.
एक रोग का दंश पाया था कहीं,कैसे उसको ही याद नहीं..
उस रोग को बांटा पत्नी से ,जिसको तनिक आभास नहीं..
संतान को विरासत मृत्यु मिली,जीवन दृश्य अनोखा  लायी हूँ..
जीवन रेखा न काटो नन्हे हाथों से ,सन्देश अनोखा लायी हूँ..
हर भाव को क्षण में जी लेना ,संगीत अनोखा लायी हूँ

.जब जी चाहे तब गा लेना ,एक गीत अनोखा  लायी हूँ..
.

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Comment

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Comment by ASHVANI KUMAR SHARMA on March 1, 2011 at 12:17am
BHAVPOORNA RACHANA HETU BADHAI
Comment by Lata R.Ojha on February 28, 2011 at 2:47pm
shukria Neelam ji :)
Comment by Neelam Upadhyaya on February 28, 2011 at 9:53am

Man ko chhu lene wali, bahut hi marmik kavita.  Bahut bahut dhanyawaad.

Comment by Lata R.Ojha on February 27, 2011 at 6:08pm
आभार अखिलेश्वर जी  ..
Comment by Akhileshwar Pandey on February 27, 2011 at 4:50pm
जो पीर से व्याकुल कर देगा वो दर्द अनोखा लायी हूँ..
जो नीर से आँखें भर देगा वो सत्य अनोखा लायी हूँ..
दिल को छू लेने वाली पंक्तियाँ हैं. धन्यवाद. 
Comment by Lata R.Ojha on February 26, 2011 at 7:04pm
बहुत बहुत आभार गणेश जी और अरुण जी .
Comment by Abhinav Arun on February 26, 2011 at 1:06pm

वाकई अनोखा गीत लता जी बहुत बहुत शुभकामनाएं !!! आपने समाज को रचना के जरिये सन्देश दिया वह दूर तक पहुंचे  यही कामना है |


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on February 26, 2011 at 11:20am
एक रोग का दंश पाया था कहीं,कैसे उसको ही याद नहीं..
उस रोग को बांटा पत्नी से ,जिसको तनिक आभास नहीं..
संतान को विरासत मृत्यु मिली,जीवन दृश्य अनोखा  लायी हूँ..
जीवन रेखा न काटो नन्हे हाथों से ,सन्देश अनोखा लायी हूँ..
लता जी , उक्त चार पक्तियों में आपने पूरी रचना की निचोड़ रख दिया है , बेहद संजीदा रचना है , आप अपनी बात कहने में सफल रही , बधाई आपको |
Comment by Lata R.Ojha on February 25, 2011 at 2:28pm
Dhanyavaad Vandana ji ..ek pratiyogita men ek nanhi si bachchi ne chitr banaaya tha ..ek gudiya ka aur phir usko laal rang se kaat dia tha ..jab poochha gaya ki kyon to uska uttar tha..'main hoon ye..mujhe AIDS hai na ,kuchh hi dinon ke baad main bhi aise hi mar jaungi ..'' na wo shabd bhoolte hain na wo ajeeb sa toofaan jo tab mann mein utha tha ..ki mrityu se pehle hi mrityu de di gayi us nanhi si jaan ko...
bas shabdon mein us vichaar ko saanjhaa karne ka prayaas hai ye ..aapki aankhon ki nami is prayaas ki safalta hai..aur yadi kisi ko kuch achchha karne ko prerit kar sake to poorn safalta hogi..aabhaar aapka..

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