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वो सुबह कभी तो आयगी …………..

वो सुबह कभी तो आयगी …………..

उफ़्फ़ !
ये आज सुबह सुबह
इतनी धूल क्योँ उड़ रही है
ये सफाई वाले भी
जाने क्योँ
फुटपाथ की जिन्दगी के दुश्मन हैं
उठो,उठो,एक कर्कश सी आवाज
कानों को चीर गयी
हमने अपनी आंखें मसलते हुए
फटे पुराने चीथड़ों में लिपटी
अपनी ज़िन्दगी को समेटा
और कहा,उठते हैं भाई उठते हैं
रुको तो सही
तभी सफाई वाले ने हमसे कहा
अरे फकीरा ,आज तो लगता है
तुम्हारी किस्मत बदल जायेगी
कल यहाँ मंत्री जी का दौरा है
ये टूटा फूटा फुटपाथ भी नया बन जाएगा
बरसों से बंद ये लेम्प पोस्ट भी
रोशन हो जाएगा
अब तो लगता है
सरकार का ध्यान सिर्फ
गरीब और गरीबी पर केन्द्रित है
हमने अपनी काया की तरह
रूखे सूखे बेरौनक और बेजान बालों पर
हाथ फेरा और हौले से मुस्कुरा कर
एक अदद चाय की भीख के लिए
चाय की थड़ी पर आ गए
थडी वाले ने तरस खा कर
हमें चाय पिला दी
तभी दूर से
प्रचार की गाडी से आवाज आई
हर गरीब को
छत,रोटी और कपड़ा देना हमारा लक्ष्य है
बस एक बार हमारा साथ दो
हम हर गरीब को बदल देंगे
जनता से ये हमारा वादा है
धीरे-धीरे उम्मीदों की आवाज़ दूर होती गयी
पता नहीं हवा में उड़ते
कौन कौन से आश्वासनों के पर्चे
फुटपाथ की थकी हारी ज़िन्दगी के
मृतप्राय अरमानों को
नई सांसें देने की चेष्टा कर रहे थे
नेताओं के भाषण
भाषणों में आश्वासन
आश्वासन में राशन
सुनते सुनते हम
बचपन से बुढ़ापे तक आ गए
खुशकिस्मत हैं हम
जो उनके काम आ गए
अपनी छत कुर्बान कर
उनके आशियाने सजा गए
अपनी किस्मत की पीठ पर तो
फुटपाथ के चुभते पत्थर हैं
तपती हुई धूप है
सूखी जली रोटियाँ हैं
हम फटे जूते से झांकते पाँव तक तो
आज तक न ढक सके
हम अपनी किस्मत क्या संवार पायेंगे
हाँ मगर गरीब नाम की बैसाखी से
ये नेता ज़रूर खुशकिस्मत हो जायेंगे
बस यही सोचते सोचते फिर हम
फुटपाथ पर आ गए और
फिर से अपने फटे पुराने चीथड़ों में
अपनी ज़िन्दगी को लपेट
पीठ पर चुभते पत्थरों के दर्द को
अपनी किस्मत मान
दूर बजते गाने में धीरे धीरे खोने लगे
वो सुबह कभी तो आयेगी , वो सुबह कभी तो आयगी …………..

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on July 5, 2014 at 10:36am

मैं आ० गोपाल भाई जी की बात से पूरी तरह सहमत हूँ , फिर भी इस आशावाद के लिए हार्दिक वधाई आ० भाई सरना जी l

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on July 4, 2014 at 6:58pm

नहीं सरना जी

वह सुबह कभी नहीं आयेगी i  किसी ने भगवान् से पूछा - भगवन भारत से भ्रष्टाचार कब ख़त्म होगा i भगवान् बोले- वत्स उस दिन तक तो मै ही जिन्दा नहीं रहूँगा i

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