For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

धूप, दीप, नैवेद बिन, आया तेरे द्वार

भाव-शब्द अर्पित करूँ, माता हो स्वीकार

 

उथला-छिछला ज्ञान यह, दंभ बढ़ाए रोज

कुंठाओं की अग्नि में, भस्म हुआ सब ओज

 

चलते-चलते हम कहाँ, पहुँच गए हैं आज

ऊसर सी धरती मिली, टूटे-बिखरे साज

 

मौन सभी संवाद हैं, शंकाएँ वाचाल

काई से भरने लगा, संबंधों का ताल

 

नयनों के संवाद पर, बढ़ा ह्रदय का नाद

अधरों पर अंकित हुआ, अधरों का अनुनाद

 

तेरे-मेरे प्रेम का, अजब रहा संयोग

नयनों ने गाथा रची, नयनन योग-वियोग

 

जटिल सभी अभिप्राय हैं, क्लिष्ट हुए सब शब्द

जड़ होती संवेदना, अवमूल्यन प्रत्यब्द  

 

लहर-लहर हर भाव है, भँवर हुआ अब दंभ

विह्वल सा मन ढूँढता, रज-कण में वैदंभ 

Views: 1119

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 18, 2014 at 10:21pm

बहुत सुन्दर दोहे सभी एक से बढ़ के एक शिल्प पर सधे हुए.बहुत-बहुत बधाई इस दोहावली पर ब्रिजेश जी |

Comment by kalpna mishra bajpai on July 18, 2014 at 10:15pm

सुंदर दोहे रचे है आप ने बधाई आपको /सादर 

Comment by बृजेश नीरज on July 18, 2014 at 7:05pm

आदरणीय जितेन्द्र जी, आपका हार्दिक आभार!

Comment by बृजेश नीरज on July 18, 2014 at 7:04pm

आदरणीया गीतिका जी आपका हार्दिक आभार! 

आप द्वारा इंगित चरण मुझे तो सही लगा. फिर भी, कुछ कमी होगी ऐसा मैं मानता हूँ. कृपया संशोधन के लिए मार्गदर्शन करें.

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on July 18, 2014 at 1:07pm

सभी दोहे बहुत सुंदर लगे आदरणीय बृजेश जी , बहुत कुछ कह जाते इन दोहों पर आपको हार्दिक बधाई

Comment by वेदिका on July 18, 2014 at 11:37am
सुन्दर दोहा प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई आ0 बृजेश जी!
आखिरी दोहे का तीसरा चरण मात्रिक होते हुए भी प्रवाह में बाधित लगा। कुछ गलत हो तो क्षमा कीजियेगा आदरणीय!

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"आदरणीय विजय निकोर जी, एक अरसे बाद आपकी कोई रचना पढ़ रहा हूँ. एकान्त और अकेलापन के बीच के अन्तर को…"
14 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . शृंगार
"बात हुई कुछ इस तरह,  उनसे मेरी यार ।सिरहाने खामोशियाँ, टूटी सौ- सौ बार ।। ............ क्या…"
15 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"इस स्नेहिल अनुमोदन हेतु हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी जी. "
15 hours ago
vijay nikore posted a blog post

सुखद एकान्त है या है अकेलापन

तारों भरी रात, फैल रही चाँदनीइठलाता पवन, मतवाला पवनतरू तरु के पात-पात परउमढ़-उमढ़ रहा उल्लासमेरा मन…See More
yesterday
vijay nikore added a discussion to the group English Literature
Thumbnail

LONELINESS

LonelinessWrit large,born out of disconnectbetween me and my Self,are slivers of Timewhere there is…See More
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey added a discussion to the group भोजपुरी साहित्य
Thumbnail

अपना बबुआ से // सौरभ

 कतनो सोचऽ फिकिर करब ना जिनिगी के हुलचुल ना छोड़ी कवनो नाता कवना कामें बबुआ जइबऽ जवना गाँवें जीउ…See More
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन। उत्तम नवगीत हुआ है बहुत बहुत हार्दिक बधाई।"
Friday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-129 (विषय मुक्त)
"चमत्कार की आत्मकथा (लघुकथा): एक प्रतिष्ठित बड़े विद्यालय से शन्नो ने इस्तीफा दे दिया था। कुछ…"
Thursday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-129 (विषय मुक्त)
"नववर्ष की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं समस्त ओबीओ परिवार को। प्रयासरत हैं लेखन और सहभागिता हेतु।"
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey posted a blog post

नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ

सूर्य के दस्तक लगाना देखना सोया हुआ है व्यक्त होने की जगह क्यों शब्द लुंठित जिस समय जग अर्थ ’नव’…See More
Wednesday
Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-129 (विषय मुक्त)
"स्वागतम"
Dec 30, 2025
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-186
"बहुत आभार आदरणीय ऋचा जी। "
Dec 29, 2025

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service