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kalpna mishra bajpai
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kalpna mishra bajpai commented on kalpna mishra bajpai's blog post हे भारत जागो !
"आदरणीय Samar kabeer जी आपका आभार /सादर "
Jan 20, 2016
kalpna mishra bajpai commented on kalpna mishra bajpai's blog post हे भारत जागो !
"आदरणीय Shyam Narain Verma जी आपका आभार /सादर "
Jan 20, 2016
kalpna mishra bajpai commented on kalpna mishra bajpai's blog post हे भारत जागो !
"अदरणीय कांता जी आपका बहुत आभार /सादर "
Jan 20, 2016
kanta roy commented on kalpna mishra bajpai's blog post हे भारत जागो !
"स्वाभिमान से जगे भोर में डग-मग ना हो तिमिर घोर मेंप्राण गवां कर शान बचाएँऐसा प्रण तन मन में भर दो हे! भारत जागो-------वाह !!! अप्रतिम सौंदर्य लिए मन में नई ऊर्जा का संचार भरती अति सुन्दर रचना ,बधाई स्वीकार करें आदरणीया कल्पना जी।"
Dec 22, 2015
Shyam Narain Verma commented on kalpna mishra bajpai's blog post हे भारत जागो !
"इस खूबसूरत रचना के लिये दिली दाद कुबूल करें"
Dec 21, 2015
Samar kabeer commented on kalpna mishra bajpai's blog post हे भारत जागो !
"मोहतरमा कल्पना जी,आदाब,इस सुन्दर प्रस्तुति हेतु हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
Dec 18, 2015
kalpna mishra bajpai posted a blog post

हे भारत जागो !

गंगा जमुनी परंपरा कोमानव मन में झंकृत कर दोवेद रिचाएँ महक उठे सबमंत्रों को उच्चारित कर दोहे! भारत जागो गुंफित हो वन उपवन सारेअवनी को शुभ अवसर दे दोरुके पलायन गाँव गली काहृदय में समरसता भर दोहे! भारत जागो बलिदानों के प्रतिबिम्बन मेंरिश्ते फूलें खुले गगन मेंछुपी हुई मंथर ज्वाला कोमानवता में मुखरित कर दोहे! भारत जागो रूप तरुण तेरा मन भावनस्वतंत्र विहार मिला है पावनहिंदुस्तान न्योछावर तुम परतरुणाई को प्रसरित कर दोहे! भारत जागो स्वाभिमान से जगे भोर में  डग-मग ना हो तिमिर घोर मेंप्राण गवां कर शान…See More
Dec 18, 2015
Nita Kasar commented on kalpna mishra bajpai's blog post शोधन मन का बहुत जरूरी!
"बेहद प्रेरक उम्दा प्रस्तुति है बधाईयां आपको आद० कल्पना मिश्रा जी ।"
Oct 27, 2015
kalpna mishra bajpai posted a blog post

पाँव में है कील पर रुकना मना है,

पाँव में  है पीर पर  रुकना मना है,प्रगति की राहों में चल थकना मना है ।--छांव को छोड़ो पचाओ धूप को तुम ,गिड़गिड़ा चहुं ओर अब तकना मना है।--दांव चलने में लगा हर एक मोहरा,बेवजह यूं मौन रह, छलना मना है ।--उत्साह  के रंग में रंगा जो दिल तिरा ,निःस्वांस में आलस्य को भरना मना है ।--सत्यजीवन भर जिया ले घाव दिल पे अवसाद में भी धाव का रिसना मना है ।--काफिले गर चल पड़े भरने उजाले ,एक भी दीपक का अब बुझना माना है ।--"कल्प"छोड़ो चैन, मन धारो सजगता,भूल में भी आँख का मलना मना है ॥ --मौलिक व अप्रकाशित कल्पना मिश्रा…See More
Oct 26, 2015
kalpna mishra bajpai commented on kalpna mishra bajpai's blog post पाँव में है कील पर रुकना मना है,
"आदरणीय राजेश कुमारी दीदी आपको रचना पसंद आई मुझे हर्ष है ।सादर आभार "
Oct 26, 2015

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari commented on kalpna mishra bajpai's blog post पाँव में है कील पर रुकना मना है,
"जीतने में सत्य को मिलते रहे है घाव भी, अवसाद में भी धाव का रिसना मना है ।---वाह  क्या बात है  बहुत बढ़िया प्रस्तुति कल्पना जी ,दिल से बधाई लीजिये   "
Oct 26, 2015
Rahila commented on kalpna mishra bajpai's blog post शोधन मन का बहुत जरूरी!
"बहुत सुन्दर नवगीत ।यूं लगा हर शब्द के साथ मन शीतल होता गया । बहुत बधाई आपको आद. कल्पना जी ।"
Oct 25, 2015
kalpna mishra bajpai commented on kalpna mishra bajpai's blog post पाँव में है कील पर रुकना मना है,
"आदरणीय  मिथिलेश वामनकर  जी आभार आपका /सादर "
Oct 23, 2015
kalpna mishra bajpai commented on kalpna mishra bajpai's blog post पाँव में है कील पर रुकना मना है,
"आदरणीया kanta roy  जी आभार आपका /सादर "
Oct 23, 2015

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर commented on kalpna mishra bajpai's blog post पाँव में है कील पर रुकना मना है,
"आदरणीया कल्पना जी बहुत बढ़िया प्रस्तुति हुई है. इस प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई निवेदित है. सादर "
Oct 22, 2015
kanta roy commented on kalpna mishra bajpai's blog post शोधन मन का बहुत जरूरी!
"खोलो कभी हृदय के फाटक बचा हुआ है गीलापन.... वाह !!! अद्भुत कोमल भाव समेटे हुए है इस पद्य के कण - कण में । फीचर पोस्ट में सम्मानित होने का गौरव तो मिलना ही था । ढेरों बधाई आपको आदरणीया कल्पना जी ।"
Oct 22, 2015

Profile Information

Gender
Female
City State
kanpur uttar pradesh
Native Place
kanpur uttar pradesh
Profession
teacher
About me
i am a teacher and i like teaching and reading books.

Kalpna mishra bajpai's Blog

हे भारत जागो !

गंगा जमुनी परंपरा को

मानव मन में झंकृत कर दो

वेद रिचाएँ महक उठे सब

मंत्रों को उच्चारित कर दो

हे! भारत जागो

 

गुंफित हो वन उपवन सारे

अवनी को शुभ अवसर दे दो

रुके पलायन गाँव गली का

हृदय में समरसता भर दो

हे! भारत जागो

 

बलिदानों के प्रतिबिम्बन में

रिश्ते फूलें खुले गगन में

छुपी हुई मंथर ज्वाला को

मानवता में मुखरित कर दो

हे! भारत जागो

 

रूप तरुण तेरा मन…

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Posted on December 17, 2015 at 8:44pm — 6 Comments

पाँव में है कील पर रुकना मना है,

पाँव में  है पीर पर  रुकना मना है,
प्रगति की राहों में चल थकना मना है ।
--
छांव को छोड़ो पचाओ धूप को तुम ,
गिड़गिड़ा चहुं ओर अब तकना मना है।
--
दांव चलने में लगा हर एक मोहरा,…
Continue

Posted on October 21, 2015 at 6:00pm — 12 Comments

शोधन मन का बहुत जरूरी!

शोधन मन का बहुत जरूरी,
क्यों खलता है खालीपन ?
**
बैठो कभी सरित के तट पर
गाते हैं मधुवन
बजते स्वर सुधियों के मद्धिम 
मधुरिम सा गुंजन
 …
Continue

Posted on October 11, 2015 at 9:00am — 11 Comments

हरसिंगार फूला नहीं समाया

शुभ्र चाँदनी ने था दुलराया

हरसिंगार फूला नहीं समाया

*****

तिर गया मदहोश हो

चमन की सुंदर हथेली पर

छुप कर खेलता आँखमिचौली

जान देता निशा की सहेली पर

सुंदरी ने जूड़े में सजाया

हरसिंगार फूला नहीं समाया

*****

खिल गया कपोलों पे

रजत कणों की कर्पूरी आभा लिए

वसुधा को करने सुगंधित

रूप अपना सादा लिए

भोर ने वृक्ष को धीरे से हिलाया

हरसिंगार फूला नहीं समाया

*****

बिछ गया बेसुध हो

मन में असीमित नेह…

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Posted on September 29, 2015 at 6:30pm — 6 Comments

Comment Wall (5 comments)

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At 9:51am on April 11, 2014, Deepak Sharma Kuluvi said…

शुक्रिया कल्पना जी मित्रता स्वीकार करने के लिए
************************************************
औरत तुझको अबला बनकर कुछ न हासिल होगा
अपनें हक़ की ख़ातिर तुझको ज़ुल्म से लड़ना होगा

(वाह नेता जी)

वाह रै भाई मुलायम यादव
सठिया से गए बुढ़ापे में
'रेप' को कहो हो बात छोटी सी
क्या हो नहीं अपणे आप्पे में
नेता'हो व्यान यूँ न दो
थारी छवि धूमल हो जावेगी
भला होवेगो माँग लो माफ़ी
कल बात वर्ना बढ़ जावेगी

*******************************

दीपक कुल्लुवी
१० -४ १४

At 11:15am on April 10, 2014, Deepak Sharma Kuluvi said…

कल्पना जी आपको दिली मुबारकवाद
बेहद खूबसूरत हैं आपकी रचनाएँ काफी लम्बे अर्से बाद बापिस लौटा हूँ बदला हुआ स्वरुप समझने में कुछ वक़्त लगेगा।

At 6:56pm on April 6, 2014,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीया श्रीमती कल्पना मिश्रा बाजपेयी जी,

सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें |प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।

आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 10:40am on February 17, 2014, कल्पना रामानी said…

कल्पना जी, आपका इस परिवार और मेरी मित्र सूची में हार्दिक स्वागत है

At 11:21pm on January 28, 2014, annapurna bajpai said…

हमारे ओबीओ परिवार मे आपका स्वागत है कल्पना जी । 

 
 
 

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