For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Kalpna mishra bajpai's Blog (54)

हे भारत जागो !

गंगा जमुनी परंपरा को

मानव मन में झंकृत कर दो

वेद रिचाएँ महक उठे सब

मंत्रों को उच्चारित कर दो

हे! भारत जागो

 

गुंफित हो वन उपवन सारे

अवनी को शुभ अवसर दे दो

रुके पलायन गाँव गली का

हृदय में समरसता भर दो

हे! भारत जागो

 

बलिदानों के प्रतिबिम्बन में

रिश्ते फूलें खुले गगन में

छुपी हुई मंथर ज्वाला को

मानवता में मुखरित कर दो

हे! भारत जागो

 

रूप तरुण तेरा मन…

Continue

Added by kalpna mishra bajpai on December 17, 2015 at 8:44pm — 6 Comments

पाँव में है कील पर रुकना मना है,

पाँव में  है पीर पर  रुकना मना है,
प्रगति की राहों में चल थकना मना है ।
--
छांव को छोड़ो पचाओ धूप को तुम ,
गिड़गिड़ा चहुं ओर अब तकना मना है।
--
दांव चलने में लगा हर एक मोहरा,…
Continue

Added by kalpna mishra bajpai on October 21, 2015 at 6:00pm — 12 Comments

शोधन मन का बहुत जरूरी!

शोधन मन का बहुत जरूरी,
क्यों खलता है खालीपन ?
**
बैठो कभी सरित के तट पर
गाते हैं मधुवन
बजते स्वर सुधियों के मद्धिम 
मधुरिम सा गुंजन
 …
Continue

Added by kalpna mishra bajpai on October 11, 2015 at 9:00am — 11 Comments

हरसिंगार फूला नहीं समाया

शुभ्र चाँदनी ने था दुलराया

हरसिंगार फूला नहीं समाया

*****

तिर गया मदहोश हो

चमन की सुंदर हथेली पर

छुप कर खेलता आँखमिचौली

जान देता निशा की सहेली पर

सुंदरी ने जूड़े में सजाया

हरसिंगार फूला नहीं समाया

*****

खिल गया कपोलों पे

रजत कणों की कर्पूरी आभा लिए

वसुधा को करने सुगंधित

रूप अपना सादा लिए

भोर ने वृक्ष को धीरे से हिलाया

हरसिंगार फूला नहीं समाया

*****

बिछ गया बेसुध हो

मन में असीमित नेह…

Continue

Added by kalpna mishra bajpai on September 29, 2015 at 6:30pm — 6 Comments

कब आओगे सरहद से ?

तुम और कॉफी दोनों का साथ

कब होगा मेरे साथ ?

तुम्हारे घर का बगीचा

पात-पात शांत

बर्फ की ओढनी ओढ़े

मुकुलित कालिका लजाती

सोखती स्वर्ण-आभा

चोटी पर तिरती सूर्य-किरणें 

खुशबू के गुंफन ने छुआ मुझे

लगा कि तुमने उढ़ाया हो,शॉल गुनगुना सा

आवृत्तियों ने मुझे घेरा

याद आने लगे वो दिन जब तुम

बैठे रहते थे बिल्कुल सामने मेरे

और तुम्हारी मूँगे जैसी आँखों में

छल्क पड़ती थी मैं बार-बार

और…

Continue

Added by kalpna mishra bajpai on September 23, 2015 at 7:30pm — 8 Comments

कृष्ण जन्माष्टमी पर चार कुण्डलिया छंद

1)

लगी कहन माँ देवकी….सुनलो तारनहार

सफल कोख मेरी करो…..मानूँगी उपकार

मानूँगी उपकार ……. रहूँ ममता में भूली

हृदय भरें उद्गार…...भावना जाये झूली

स्वारथ हो ये जन्म...जाऊँ बन तेरी सगी

हे करुणा के धाम,लगन मनसा ये लगी॥

***************************************

 2)

कारा गृह में अवतरित......दीनबंधु भगवान

मातु-पिता हर्षित हुए, लख शिशु की मुस्कान

लख शिशु की मुस्कान, व्यथा बिसरी तत्क्षण…

Continue

Added by kalpna mishra bajpai on September 7, 2015 at 8:00pm — 10 Comments

पावस की भोर

सुनो सखी !

लगती मनमोहक 

पावस की धुली हुई भोर

करती सबको आत्म विभोर

पुष्प से मांगती है मकरंद

छोने दुलराती बागों में मोर

अटकती बलरियों

लटकती वसुधा जी की गोद

देखो लगती मौन मुखर सी

पावस की धुली हुई भोर

 

भाल प्राची का सजाती

केशर तिलक वो लगाती

अलिक्षित शांति से परिपूर्ण

दर्पण ऑस बूंदों को बनाती

सम्हलती तिमिर के उर में

लजाती नव दुल्हन सी

पावस की धुली हुई भोर

 

कमल…

Continue

Added by kalpna mishra bajpai on July 26, 2015 at 2:00pm — 4 Comments

ला रहा रवि पालकी

ला रहा रवि पालकी

 

 

खोल कर आकाश के पट

चल पड़ा है सारथी

खिल रहीं मदहोश कलियाँ

ला रहा रवि पालकी

 

भोर में ममता लुटाती

स्वर सजीली रागिनी

आ विराजा श्याम कागा

चल सखी-री जाग-री

 

प्रात का मंचन अनोखा

रश्मियाँ— अप्लावतीं

 

तृप्त तारक चल पड़े

विश्रांति की आगोश में

चाँदनी मुख ढक चली

सब आ गए यूं होश में

 

मौन सपनों को सजाने

चल पड़े सब…

Continue

Added by kalpna mishra bajpai on July 21, 2015 at 10:01pm — 14 Comments

माँ क्यों चुप हो?कुछ तो बोलो

मदर्स दे आने वाला है बस एक दिन के लिए 

--------------------------------------------------

माँ क्यों चुप हो कुछ बोलो तो  ?

अपने मन की पीड़ा को

मेरे आगे खोलो तो

माँ तुम क्यों चुप हो ?

 

कर्तव्य निष्ठ की बेदी बन

तुमने अपने को…

Continue

Added by kalpna mishra bajpai on April 30, 2015 at 8:30pm — 7 Comments

देव -वंदना

भोर के स्वर गान में 

आकर बसे तुम प्राणों में

रश्मि मुग्धा ले चली 

अनुराग सागर की तली

सीप की उच्छवांस में 

आकार बसे तुम लहर में

मौन होकर रात भागी 

तारकों को विरक्ति लागी 

आकाश के सोपान में 

आकर बसे तुम भानु में

प्रेम के संतृप्त मन में 

नेह से डोले बदन में 

चारणों की मधुर धुन में 

आकर बसे तुम शब्दों में

नीद के विश्वास में 

अभिलाष के अवकाश…

Continue

Added by kalpna mishra bajpai on April 20, 2015 at 9:00pm — 7 Comments

तुमसे अकेले में मुलाक़ात

आज झुरमुट से उजास में

शुभ्र नूतन सा गुलाबी प्रभात

तुम से की, शरमाते हुए ,

आज कितने दिनों के बाद

तुमसे अकेले में की मुलाक़ात

 

और अपलक रही थी निहार…

Continue

Added by kalpna mishra bajpai on March 28, 2015 at 9:30am — 6 Comments

नूतन गीत



नूतन वर्ष सुहाना आता 

-------------------------

नूतन वर्ष सुहाना आता 

माता की गोदी में चढ़ कर

मन ही मन हर्षाता

 

दिनकर चुनरी लाल उड़ाता 

शीतल पवन झकोरे लाता 

कच्ची कच्ची धूप मनोहर 

मलिया शगुन सुनाता

 

बगिया की गोदी में खिल कर 

दिवस मल्हारें गाता ।

 

कलियाँ खिल कर युवा हो गईं 

झोली भर कर सुगंध ले आईं 

अंगनाई उर महके चन्दन 

तितली काया सौरभ धोई

 

भोर की गोदी सूरज चढ़ कर…

Continue

Added by kalpna mishra bajpai on March 21, 2015 at 9:30am — 12 Comments

गौरैया दिवस पर कुछ दोहे

आँगन के ऊपर बना ,सरिया का आकाश

दाना नीचे है पड़ा खा पाती मैं काश ॥

अंबर पर उड़ते मिले ,चतुर सयाने बाज

जीवन कितना है कठिन ,हम जैसों का आज ॥ 

सूरज दादा भी तपें ,करें गज़ब का खेल

सूख गए वन बावड़ी,बची न कोई बेल ॥

एक दिवस में क्या मिले,कैसे रखलूँ धीर

सोच सोच ये बात को,मन में उठती पीर ॥

मन करता है आज भी,आँगन फुदकूँ जाय

झूला झूलूँ तार पर......मुन्नी लख हर्षाय ॥

अप्रकाशित व मौलिक 

कल्पना मिश्रा…

Continue

Added by kalpna mishra bajpai on March 21, 2015 at 12:00am — 13 Comments

मन भावन पैगाम (दोहे )

मन भावन पैगाम सब ,रक्खे बड़े सम्हाल 

आते जब भी सामने,कहते सारा हाल ॥

स्नेह पगे जो शब्द हैं,करते अब मनुहार 

इक-इक पाती प्रेम की,कहती बात हजार ॥

आखर में जब तुम दिखो,भर आती है लाज 

आवेदन ये प्रेम का ,भर जाते  है आज ॥

बिना कहे सब बोलती,हृदय की ये बात

आमंत्रण देती रहीं ,सपनों की बारात ॥

पाती में मिलते रहे ,सूखे सुमन गुलाब

मन मंदिर ले बाचती, खुशबू भरी…

Continue

Added by kalpna mishra bajpai on March 16, 2015 at 12:00pm — 11 Comments

दोहे (गंगा माँ )

गंगा माँ की गोद में,बसा कानपुर धाम

सरसैया के घाट पर, उगती सहर तमाम  ॥

 

महा आरती मात की, कर लो हृदय लगाय

  कट जायें संकट सभी ,सुंदर सरल उपाय ॥

 

हिमगिर के उर से बही,पसरी वसुधा गोद

लहराती वो चल पड़ी,भरती मन आमोद 

 

मोक्षदायनी याद में , कहाँ भागीरथ आज

उनका तप बल याद कर,सफल बना लो काज ॥

 

गंगा गीता गाय को , प्यार करें भगवान

मानव इसको भूल…

Continue

Added by kalpna mishra bajpai on March 12, 2015 at 11:30am — 20 Comments

किताब /पुस्तक पर -दोहे

पुस्तक गुण की खान है,सीखें रखती गोय

जो उसका प्रेमी बना ,जग में जय जय होय॥

सखी भरी है ज्ञान से,उर में रखती भाव

पढ़-पढ़ के हासिल करो,रहे न ज्ञान अभाव॥

इस पूरे संसार की,जो रखती है थाह

दुनियाँ में कैसे मिली,किसको कहाँ पनाह॥

वर्ण-वर्ण मिल बन गई,सुंदर सुखद किताब

मनसा वाचा कर्मणा ,रख लो खूब हिसाब ॥

गुणी जनों ने बैठ कर,लिखे सुघर मंतव्य

रुचि जिसकी जिसमें रहे, खोजो वो…

Continue

Added by kalpna mishra bajpai on March 11, 2015 at 10:00am — 9 Comments

कुण्डलिया छंद (अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष_

नारी अब चेतन हुई ,बदला उसका रूप 

हर मौसम हर समय वो ,लेती नए स्वरूप 

लेती नए स्वरूप ,आसमां पर छा जाती 

सहती हर संघर्ष ,दिलेरी खूब दिखाती 

स्वाभिमान को जान,स्वयं पर जाती वारी

खूब कमाती मान ,आज कीशिक्षित नारी ॥ 

अप्रकाशित व मौलिक 

कल्पना मिश्रा बाजपेई 

Added by kalpna mishra bajpai on March 8, 2015 at 4:00pm — 12 Comments

दोहे भाग 3

घूँघट पट क्यों ओढ़ती,तुम पर मैं बलिहार

घट मेरे बसती सदा,तुम पर जान निसार ॥

गोरी तुम मैं सांमला,प्रीत घनेरी होय

राधा वर मैं बन गया,जो होए सो होय ॥

बंशी मेरी टेरती , तुम को सुबहो शाम

दर्शन श्यामा के बिना ,हमें कहाँ आराम॥

बहुत हुआ अब चुप रहो,नटवर नागर नन्द

मदन माधुरी डालते, भरते दिल आनन्द ॥

पुष्प लता है  बावरी ,प्रेमातुर संसार

कंठ कंठ में रम रहा ,दामोदर करतार॥

मौलिक व अप्रकाशित 

कल्पना…

Continue

Added by kalpna mishra bajpai on March 4, 2015 at 3:00pm — 9 Comments

फागुन लालित्य पर ... सार ललित छंद

छन्न पकैया, छन्न पकैया, बाबा देवर लागें

फागुन रुप  धरे मतवाला,भाव सुहाने जागे ॥

छन्न पकैया, छन्न पकैया, राधा है शरमीली

अस्सी गज का लहँगा पहने,चोली रंग रँगीली ॥

छन्न पकैया, छन्न पकैया, आम्र सुनहरे बौरे

केसर के नव पल्लव उगते, घूमें लोलुप भौरे ॥

छन्न पकैया, छन्न पकैया,पिक बयनी हरषाए

कुहू-कुहू करती रहती वो, सबके मन को भाए ॥

छन्न पकैया, छन्न पकैया, गेंदा चम्पा महके

शीतल मंद सुगंध हवा में, प्रेमी जोड़ा बहके…

Continue

Added by kalpna mishra bajpai on February 28, 2015 at 10:30am — 14 Comments

होली गीत

छाई रंगों की मधुर फुहार

रंगीली आई होली

सखी री आई होली

 

अंग सजन के रंग लगाऊँ

मन ही मन में खूब लजाऊँ

फगुनिया चलती बयार

सखी री आई होली

 

नेह में डूबी पवन बावरी

मन मंदिर में पी छवि सांवरी

नथुनिया की होठों से रार

सखी री आई होली

 

शाम सिंदूरी अति हर्षाये

अखियों से मदिरा छलकाए

चंदनियाँ करे मनुहार

सखी री आई होली

 

चम्पा चमेली गजरे में महके

दर्पण देख के मनवा…

Continue

Added by kalpna mishra bajpai on February 27, 2015 at 8:00am — 18 Comments

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Dr. Geeta Chaudhary commented on Samar kabeer's blog post "ओबीओ की सालगिरह का तुहफ़ा"
"आदरणीय समर कबीर सर, सुंदर प्रस्तुति, बिल्कुल सही कहा आपने बहुत ही अनोखा अनुभव इस मंच का। …"
7 hours ago
Amar Pankaj (Dr Amar Nath Jha) posted a blog post

ग़ज़ल: अमर नाथ झा

चाहते हो तुम मिटाना नफ़रतों का गर अँधेरा हाथ में ले लो किताबें जल्द आएगा सवेराहै जहालत का कुआँ गहरा…See More
8 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

क्षणिकाएँ :

क्षणिकाएँ :थरथराता रहा एक अश्क आँखों की मुंडेर पर खंडित हुए स्पर्शों की पुनरावृति की प्रतीक्षा…See More
10 hours ago
कंवर करतार posted a blog post

ग़ज़ल

ग़ज़ल 1222    1222      1222       1222कोई कातिल सुना जो  शहर में है बेजुबाँ आयाकिसी भी भीड़ में छुप…See More
10 hours ago
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post ग़रीब हूँ मैं मगर शौक इक नवाबी है(८०)
"भाई Salik Ganvir  जी , उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक आभार | "
13 hours ago
कंवर करतार commented on कंवर करतार's blog post ग़ज़ल
"जनाब समर कवीर साहब ,आदाब कवूल करें I आपके सुझाव बेमिसाल हैं , अश'आर को निखारने के लिए बहुत…"
13 hours ago
Salik Ganvir commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post ग़रीब हूँ मैं मगर शौक इक नवाबी है(८०)
"आदरणीय गहलोत जी एक शानदार ग़ज़ल पोस्ट करने पर मेरी हार्दिक बधाई स्वीकार करें. वाह. कबूतरों की हवस हो…"
15 hours ago
कंवर करतार commented on कंवर करतार's blog post ग़ज़ल
"जनाब समर कवीर साहब ,आदाब कवूल करें I आपके सुझाव बेमिसाल हैं , अश'आर को निखारने के लिए बहुत…"
16 hours ago
Samar kabeer commented on कंवर करतार's blog post ग़ज़ल
"'धरा रह जायेगा  इन्सान का हथियार हर कोई ' ये मिसरा ठीक है । 'घरों में कैद होकर…"
16 hours ago
Dr Vandana Misra posted a blog post

"विश्व स्वास्थ्य दिवस" पर एक मुक्तक

विश्व स्वास्थ्य दिवस" पर एक मुक्तक*****************************सर्वे भवन्तु सुखिनः की आज करें मिल…See More
17 hours ago
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post ग़ज़ल मनोज अहसास
"हार्दिक आभार आदरणीय प्रयास जारी रहेगा आशीर्वाद बनाए रखें"
19 hours ago
Salik Ganvir posted blog posts
20 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service