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गीत (कल्पना मिश्रा बाजपेई)

बंसी का बजाना खेल भी है

गिरिवर का उठाना खेल नहीं

भक्तों के भारी संकट में

दुख दर्द मिटाना खेल नहीं है !!

 

एक विप्र सुदामा आया था

वो भेंट में तंदुल लाया था

पल भर में ही दीन दुखी को

धनवान बनाना खेल नहीं !!

 

कौरव दल द्रुपद दुलारी की

सुन कर पुकार दुखियारी की

दो गज की सारी में देखो

अंबार लगाना खेल नहीं !!

 

था कंस बड़ा अत्याचारी

देता था सबको दुख भारी

उसको जा मारा मथुरा में

दुष्टों को घटाना खेल नहीं !!

 

बंसी का बजाना खेल भी है

गिरिवर का उठाना खेल नहीं

 

कल्पना मिश्रा बाजपेई

(मौलिक व अप्रकाशित)  

 

 

 

Views: 3890

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Comment by kalpna mishra bajpai on August 22, 2014 at 10:45pm

शुक्रिया आ0 सौरभ सर /सादर 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on August 22, 2014 at 12:24am

आपका प्रयास और आपकी रचना प्रभावी है.

शुभ-शुभ

Comment by kalpna mishra bajpai on August 20, 2014 at 10:32pm

आ०  savitamishra जी आप का बहुत शुक्रिया /सादर 

Comment by kalpna mishra bajpai on August 20, 2014 at 10:31pm

आ०Santlal Karun जी आप का बहुत शुक्रिया /सादर  

Comment by kalpna mishra bajpai on August 20, 2014 at 10:30pm

आ० rajesh kumariदी आप का बहुत शुक्रिया /साभार 

Comment by kalpna mishra bajpai on August 20, 2014 at 10:30pm

आ० वेदिका  जी बहुत शुक्रिया /सादर  

Comment by kalpna mishra bajpai on August 20, 2014 at 10:29pm

आ० गिरिराज भंडारी जी आप का बहुत शुक्रिया /सादर 

Comment by kalpna mishra bajpai on August 20, 2014 at 10:28pm

आ० जितेन्द्र 'गीत'भाई आप का हार्दिक शुक्रिया /साभार 

Comment by kalpna mishra bajpai on August 20, 2014 at 10:27pm

आ० JAWAHAR LAL SINGH जी आप का हार्दिक आभार /सादर 

Comment by savitamishra on August 20, 2014 at 7:42pm

भक्तिभाव से ओतप्रोत ,.....बहुत सुन्दर

कृपया ध्यान दे...

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