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तुम और कॉफी दोनों का साथ

कब होगा मेरे साथ ?

तुम्हारे घर का बगीचा

पात-पात शांत

बर्फ की ओढनी ओढ़े

मुकुलित कालिका लजाती

सोखती स्वर्ण-आभा

चोटी पर तिरती सूर्य-किरणें 

खुशबू के गुंफन ने छुआ मुझे

लगा कि तुमने उढ़ाया हो,शॉल गुनगुना सा

आवृत्तियों ने मुझे घेरा

याद आने लगे वो दिन जब तुम

बैठे रहते थे बिल्कुल सामने मेरे

और तुम्हारी मूँगे जैसी आँखों में

छल्क पड़ती थी मैं बार-बार

और तुम बिना समेटे ही मेरे हो जाते थे

तुम्हारे नाम का कॉफी-मग

आज भी रखती हूँ अपने सामने

सच कहूँ ये कॉफी भी बे-स्वाद हो गई है

न जाने शक्कर कि जगह-नीबा क्यों

पड़ जाता है इसमें,खैर छोड़ो .......

जल्दी आओ ना !

मुझे देखने हैं श्वेत बर्फीले क्वारे नजारे

तुम्हारे साथ व्याहता बन

कब आओगे सरहद से ?

अप्रकाशित व मौलिक 

कल्पना मिश्रा बाजपेई 

Views: 779

Comment

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Comment by kalpna mishra bajpai on September 28, 2015 at 10:11pm

आभार आपका Ram Ashery जी 

Comment by kalpna mishra bajpai on September 28, 2015 at 10:11pm

आभार आपका आदरणीय गिरिराज भंडारी जी 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on September 28, 2015 at 8:38am

आदरनीया . बहुत सुन्दर भाव पूर्ण रचना , अपने होने वाले पति की बिछोह को खूब शब्द मिले हैं । बधाई आपको ।

Comment by Ram Ashery on September 26, 2015 at 9:01pm

आपने अपने मन की पीड़ा को शब्दों के माध्यम से बहुत ही सुंदर तरीके से रखा है। आपको बहुत बहुत बधाई स्वीकार हो 

Comment by kalpna mishra bajpai on September 24, 2015 at 9:15pm

आदरणीय कांता रॉय जी आपका आभार /सादर 

Comment by kanta roy on September 24, 2015 at 1:25pm
याद आने लगे वो दिन जब तुम
बैठे रहते थे बिल्कुल सामने मेरे
और तुम्हारी मूँगे जैसी आँखों में
छल्क पड़ती थी मैं बार-बार
और तुम बिना समेटे ही मेरे हो जाते थे
....... वाह !!! कब आओगे सरहद से ? इंतज़ार में कितनी शिद्दत समाई है । क्या सुंदर सुखद एहसास पिरोई है आपने अपनी इस रचना में आदरणीया कल्पना मिश्रा बाजपेयी जी । पढकर लाजवाब हो गये हम । अद्भुत ! बधाई हो
Comment by kalpna mishra bajpai on September 23, 2015 at 9:11pm

अदरणीय आपने बिल्कुल सत्य कहा ये मेरी न समझी है। सादर आभार 

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on September 23, 2015 at 9:04pm

बहुत भावपूर्ण रचना . कुछ स्पेलिंग की गलतियाँ खटकती है  जैसे शरहद . इसे सरहद होना चाहिए .

कृपया ध्यान दे...

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