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"अरे जरा पता तो कर, इस एरिआ में स्साला कौन पैदा हो गया जो मेरे घर में चोरी कर गया." नेताजी गरजते हुए बोले । 
"भईया जी, पता चल गया है, इ काम कल्लुआ गिरोह का है, चोरी के माल के साथ बड़का गाँव में छुपा हुआ है, आप कहें तो पुलिस भेज कर उसे चोरी के माल के साथ गिरफ्तार करवा दें ?"
"अबे पगला गया है क्या ? जीते जी मरवायेगा !!! उ कल्लुआ को खबर करवा दे, किसी हाल में वो पुलिस के हाथ नहीं लगना चाहिए ।" 
"आयं !!! वो क्यों भईया जी ?"
"रे बकलोल, उसका जो होगा सो होगा, मगर हमारा ………

(मौलिक व अप्रकाशित)

पिछला पोस्ट => लघुकथा : भुट्टे वाली

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on February 12, 2015 at 1:54am

कटाक्ष सीधा निशाने पे लगा 


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on October 19, 2014 at 9:56am

सराहना हेतु बहुत बहुत आभार आदरणीय विनय कुमार सिंह जी ।


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on October 19, 2014 at 9:55am

आदरणीय संतलाल करुण जी, लघुकथा पर आपसे प्राप्त आशीर्वाद हेतु आभार व्यक्त करता हूँ।


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on October 19, 2014 at 9:52am

आदरणीय डॉ गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी, लघुकथा पर आपकी समीक्षात्मक टिप्पणी उत्साहवर्धन करती है,हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ, स्नेह सदैव बना रहे, सादर।


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on October 19, 2014 at 9:48am

लघुकथा को सराहने हेतु बहुत बहुत आभार आदरणीय जीतेन्द्र जी। 


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on October 19, 2014 at 9:47am

लघुकथा आपको अच्छी लगी श्रम सार्थक हुआ, बहुत बहुत आभार आदरणीया राजेश कुमारी जी।


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on October 19, 2014 at 9:43am

Thanks Dr. Vijai Shanker jee for your valuable comments. 

Comment by savitamishra on July 25, 2014 at 10:03pm

जबरदस्त कटाक्ष करती लघु कथा

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on July 24, 2014 at 6:36pm

एक तो अथाह संपदा का राज खुलने कर, दुसरे  नेताजी का जिसके संग चोली दामन का साथ हो वही चोर निकले तो 

संतोष करने के सिवा रास्ता क्या ? ये कहानी नेताजी के यक्तित्व पर सटीक निशाना साध रही है | वाह !! बहुत खूब 

अतिशय बधाई इस लघु कहानी के लिए श्री गणेशजी "बागी" जी 

Comment by अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव on July 24, 2014 at 5:16pm

आदरणीय गणेश  भाईजी,

एक कहावत है....  चोर का माल चाँडाल खाय । यहाँ कहावत उलटी हो गई .........  चाँडाल का माल चोर खाय ।                               चोर - चोर मौसेरे भाई भी कहलाते हैं । 

दो मौसेरे भाईयों की लघु कथा के लिए हार्दिक बधाई । 

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