For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

डायरी और उसके पन्ने ...

धूल में दबी हुयी ये डायरी

जिसकी एक एक परत की हैं ये यादें

हर एक सफा तुम्हारी याद है

.... न जाने कहाँ कहाँ रखा उसे

..... आलमारी मे ठूसा

..... बक्से में दबाया

.... ऊपर टाँड़ पर रखा

अटैची मे रखा ....

उसके पन्नों के रंग उतर गए

मगर लिखावट वही रही

आज भी देखकर उन सफ़ों को

और आपके उन हिसाबों को देखकर

उन हिसाबों मे हमारा भी अंश हैं

जिन्हे आज देखकर महसूस करता हूँ

उन सफ़ों पे लिखा आपका हिसाब

दूध वाले को  - 65 रुपये

सब्जीवाले को  - 120 रुपए

टाफी में  - 2 रुपए

बच्चों की फीस  - 20 रुपये

और भी बहुत कुछ

आज से इसका गहरा संबंध  है

इन सफ़ों में आपकी ममता की जो खुशबू है

डायरी की एक एक परत मे जो छिपा है

वह हमारे जाने के बाद भी बोलेगा

यादें आदमी के जाने के बाद भी बोलती हैं

इन पन्नों को सहेज दो

बंद कर दो, क्यूंकी

माँ की याद तो आ गई

मगर माँ .... ...

 

 

(मौलिक व  अप्रकाशित )

 

Views: 510

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Amod Kumar Srivastava on August 6, 2014 at 8:02pm

बहुत बहुत धन्यवाद आ0 सौरभ पांडे सर... आपका सुझाव सर आँखों पर ... सादर ... 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on August 4, 2014 at 3:44pm

ममत्व भाव के प्रति कृतज्ञता ज्ञापन नहीं होता, मात्र नत होना होता है. भाव से बहुत ही सात्विक प्रस्तुति है. जबकि शिल्प से सहज. हार्दिक बधाई स्वीकार करें, भाईजी.

अलबत्ता, रचना की अंतिम पंक्ति हट जाय तो रचना निर्पेक्ष होती हुई भी अत्यंत संप्रेषणीय हो जायेगी.
ऐसा मैं सोचता हूँ.
शुभ-शुभ

Comment by Amod Kumar Srivastava on August 3, 2014 at 6:41pm

आ0 निकोर सर ... बहुत बहुत धन्यवाद ... आभार 

Comment by Amod Kumar Srivastava on August 3, 2014 at 6:41pm

आ0 मीना दी ... धन्यवाद .... सादर ॥ 

Comment by Amod Kumar Srivastava on August 3, 2014 at 6:40pm

आ0 प्राची दी ... आपके आशीर्वचन से मे धन्य हुआ ... सादर 

Comment by Amod Kumar Srivastava on August 3, 2014 at 6:40pm

आ0 गोपाल सर धन्यवाद उत्साहवर्धन के लिए ... आभार 

Comment by vijay nikore on August 3, 2014 at 4:25pm

//यादें आदमी के जाने के बाद भी बोलती हैं

इन पन्नों को सहेज दो

बंद कर दो, क्यूंकी

माँ की याद तो आ गई//

दिवंगत आत्मा की याद को आपने बहुत ही खूबी से, सरलता से मान दिया है। हार्दिक बधाई, आदरणीय आमोद जी।

Comment by Meena Pathak on August 2, 2014 at 3:33pm

मर्मस्पर्शी रचना ...


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on August 1, 2014 at 3:16pm

डायरी में लिखा हिसाब सिर्फ हिसाब न हो कर जीवन का फलसफा कहता है... माँ साथ ना हो कर..आज भी चैतन्य रूप में ज़िंदा है उस चेतना को डायरी पर जमी धुल की परतें मिटा सकें..ऐसी तो उनकी हैसियत नहीं.

मन को स्पर्श करने वाली इस प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई आ० आमोद श्रीवास्तव जी 

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on August 1, 2014 at 11:40am

आमोद जी

मुझे भी माँ याद आ गयी  i  अच्छी  रचना है i  सुन्दर i

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अशोक भाईजी धन्यवाद ... मेरा प्रयास  सफल हुआ।"
11 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"वाह वाह वाह !!! बहुत दिनों बाद ऐसी लाजवाब प्रतिक्रिया पढने में आई है। कांउटर अटैक ॥ हजारों धन्यवाद…"
11 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"  आदरणीय शेख शाहज़ाद उस्मानी जी सादर, सरकारी शालाओं की गलत परम्परा की ओर ध्यान आकृष्ट कराती…"
11 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"सार्थक है आपका सुझाव "
11 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदाब।‌ रचना पटल पर उपस्थिति और समीक्षाओं हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीया प्रतिभा पाण्डेय जी। मेरी…"
11 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"हार्दिक धन्यवाद आदरणीया प्रतिभाजी ।  इसमें कुछ कमी हो सकती है लेकिन इस प्रकार के आयोजन शहरों…"
11 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब सादर, बिना सोचे बोलने के परिणाम पर सुन्दर और संतुलित लघुकथा…"
11 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"अमराई में उत्सव छाया,कोयल को न्यौता भिजवाया। मौसम बदले कपड़े -लत्ते, लगे झूमने पत्ते-…"
11 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"ठण्ड गई तो फागुन आया। जन मानस में खुशियाँ लाया॥ आम  लगे सब हैं बौराने। पंछी गाते सुर में…"
12 hours ago
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"लघुकथा किसी विसंगति से उभरती है और अपने पीछे पाठको के पीछे एक प्रश्न छोड़ जाती है। सबकुछ खुलकर…"
12 hours ago
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अखिलेश जी स्वयं के प्रचार प्रसार के लिए इस तरह के प्रायोजित कार्यक्रमों का चलन साहित्य और…"
12 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"  जी ! //हापुस लँगड़ा नीलम केसर। आम सफेदा चौसा उस पर।।//... कुछ इस तरह किया जा सकता है.…"
12 hours ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service