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वो मेरा कुछ नहीं लगता
और मैं कोई महान व्यक्ति भी नहीं
फिर भी बार बार वो
मेरे पैर पकड़ रहा था  
पता है क्यों ?
मैंने सिर्फ दो रोटी दी उसे
**************************
बहुत दुश्मन है उसके
गलती ?
बहुत अच्छा आदमी है वो
*******************************
सिसकियाँ मत लो ग़म-गीं हवाओ
चुप हो जाओ
पता है क्यों?
वो आ रहीं है
*********************************
लोग कहते है उनकी आँखों में
प्यार का समंदर है
फिर भी मैं क्यों ?
प्यासा लौटा
****************************
राम शिरोमणि पाठक"दीपक"
मौलिक/अप्रकाशित

Views: 615

Comment

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Comment by ram shiromani pathak on August 30, 2014 at 9:00pm

अमुल्य सुझाव हेतु बहुत बहुत आभार आदरणीया प्राची जी। .....     सादर 

Comment by ram shiromani pathak on August 30, 2014 at 8:59pm

अमुल्य सुझाव हेतु बहुत बहुत आभार आदरणीय सौरभ  जी। .....     सादर 

Comment by ram shiromani pathak on August 30, 2014 at 8:57pm

बहुत बहुत आभार आदरणीय गोपाल नारायण जी 

Comment by ram shiromani pathak on August 30, 2014 at 8:56pm

बहुत बहुत आभार  आदरणीया rajesh kumaari जी 

Comment by ram shiromani pathak on August 30, 2014 at 8:55pm

बहुत बहुत आभार भाई pawan kumaar जी 

Comment by ram shiromani pathak on August 30, 2014 at 8:54pm

बहुत बहुत आभार आदरणीया savita जी 

Comment by ram shiromani pathak on August 30, 2014 at 8:54pm

बहुत बहुत आभार आदरणीया saritaa जी 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on August 26, 2014 at 11:38pm

बहुत सार्थक खूबसूरत कथ्य हर क्षणिका का ...पर शिल्प अभी और कसा जा सकता था.

दूसरी और चौथी क्षणिका पर विशेष बधाई प्रेषित है 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on August 26, 2014 at 12:07am

क्षणिकाएँ वैचारिक रूप से बहुत अच्छी हैं. इसके लिए अनेकानेक बधाइयाँ

वैसे प्रस्तुीकरण और अच्छा हो सकता है. हो सकता है अंतर्निहित भाव को स्पष्ट करने के लिए प्रस्तुतियों में प्रश्नवाचक वाक्यांश डालना एक प्रयोग हो, लेकिन इन वाक्यांशों के बिना प्रस्तुतियाँ अधिक सधतीं.

खैर हम यों भी कुछ इतर सोच लेते हैं. अन्य पाठकों के विचारों को जानना भी उचित होगा. 

शुभेच्छाएँ

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on August 25, 2014 at 5:55pm

पाठक जी

क्षणिकाओ में है दम

पता है क्यों ?

आप नहीं किसी से कम i

कृपया ध्यान दे...

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