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खुद का भी अहसास लिखो

खुद का भी अहसास लिखो!
एक मुकम्मल प्यास लिखो!!

उससे इतनी दूरी क्यों !
उसको खुद के पास लिखो !!

खाली गर बैठे हो तुम!
खुद का ही इतिहास लिखो !!

 गलती उसकी बतलाना !
खुद का भी उपहास लिखो!!

हे ईश्वर ऊब गया हूँ!
मेरा भी अवकाश लिखो!!
***************************
राम शिरोमणि पाठक"दीपक"
मौलिक/अप्रकाशित
 

Views: 982

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Comment by ram shiromani pathak on September 4, 2014 at 12:10am
हार्दिक आभार आदरणीया सीमाहरी जी सादर
Comment by ram shiromani pathak on September 4, 2014 at 12:08am
हार्दिक आभार आदरणीय नरेन्द्र जी सादर
Comment by seemahari sharma on September 2, 2014 at 11:28pm
सुंदर गजल बधाई
Comment by ram shiromani pathak on August 30, 2014 at 8:46pm

बहुत बहुत आभार आदरणीय  bhai  Pawan Kuma जी 

Comment by ram shiromani pathak on August 30, 2014 at 8:46pm

बहुत बहुत आभार आदरणीय  Dr Ashutosh Mishra  जी 

Comment by ram shiromani pathak on August 30, 2014 at 8:45pm

बहुत बहुत आभार आदरणीया MAHIMA SHREE  जी 

Comment by ram shiromani pathak on August 30, 2014 at 8:44pm

बहुत बहुत आभार आदरणीया  Dr.Prachi Singh जी 

Comment by ram shiromani pathak on August 30, 2014 at 8:43pm

बहुत बहुत आभार आदरणीया  Sarita Bhatia  जी 

Comment by ram shiromani pathak on August 30, 2014 at 8:43pm

बहुत बहुत आभार आदरणीय  laxman dhami जी 

Comment by ram shiromani pathak on August 30, 2014 at 8:41pm

बहुत बहुत आभार आदरणीया कल्पना जी 

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