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हमारे दर्द को दुनिया

हमारे दर्द को दुनियाँ तमाशो में न गा जाये

बजा ताली सभी झूमें हमारा दर्द भा जाये

न आये है किनारे पर अभी ठहरा समुन्‍दर है।

बड़ी खामोश लहरे हैं कहीं तूफाँ न आ जाये।।

सहेगें जुल्‍म अब कितना बड़ा जालिम हुआ हाकिम।

पड़ी थी लाश सड़को पे कफन वो बेच खा जाये।।

सभालो अब वतन अपना तबाही का दिखे मंजर

घरों में आज खुशियाँ है कहीं मातम न छा जाये

जला कर आस का दीपक न जाओ छोड़ कर हमको '

कुचलने का हमारा सिर न दुश्‍मन मौका पा जाये

मौलिक एवं अप्रकाशित अखंड गहमरी

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Comment by JAWAHAR LAL SINGH on September 11, 2014 at 6:55pm

सभालो अब वतन अपना तबाही का दिखे मंजर

घरों में आज खुशियाँ है कहीं मातम न छा जाये

सुन्दर पंक्तियाँ अच्छे भाव के साथ!

Comment by Akhand Gahmari on September 10, 2014 at 12:49pm

हम आपके उत्‍सावर्धन एवं मार्गदर्शन्‍ा के सदैव आकांक्षी है नमन स्‍वीकार करें आदरणीय Dr. Vijai Shanker जी

Comment by Dr. Vijai Shanker on September 10, 2014 at 12:09pm
बहुत ही सुन्दर रचना आदरणीय अखंड गहमरी ' जी , बहुत बहुत बधाई .
Comment by Akhand Gahmari on September 10, 2014 at 12:02pm

हम आपके उत्‍सावर्धन एवं मार्गदर्शन्‍ा के सदैव आकांक्षी है नमन स्‍वीकार करें आदरणीय राम शिरोमणी पाठक जी

Comment by Akhand Gahmari on September 10, 2014 at 12:02pm

हम आपके उत्‍सावर्धन एवं मार्गदर्शन्‍ा के सदैव आकांक्षी है नमन स्‍वीकार करें आदरणीय हरि‍वल्‍लभ्‍ज्ञ शर्मा जी

Comment by Akhand Gahmari on September 10, 2014 at 12:01pm

हम आपके उत्‍सावर्धन एवं मार्गदर्शन्‍ा के सदैव आकांक्षी है नमन स्‍वीकार करें आदरणीया कल्‍पना रामानी जी 

Comment by Akhand Gahmari on September 10, 2014 at 12:01pm

हम आपके उत्‍सावर्धन एवं मार्गदर्शन्‍ा के सदैव आकांक्षी है नमन स्‍वीकार करें आदरणीय डा0 गोपाल नारायण श्रीवास्‍तव जी

Comment by ram shiromani pathak on September 8, 2014 at 10:38pm
अखंड भाई आप तो चौका रहें है आजकल।। आप इसी गति से बढ़ते रहे।। शुभ शुभ
Comment by harivallabh sharma on September 8, 2014 at 9:21pm

अति सुन्दर ग़ज़ल आदरणीय गहमरी साहब, 

सहेगें जुल्‍म अब कितना बड़ा जालिम हुआ हाकिम।

पड़ी थी लाश सड़को पे कफन वो बेच खा जाये।।...हकीक़त बयाँ करते अशआर ...लाजबाब...बधाई आपको.

Comment by कल्पना रामानी on September 8, 2014 at 9:14pm

आदरणीय गहमरी जी, बहुत सुंदर गजल कही है, मन से बधाई आपको

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