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ग़ज़ल...मुस्कुराना आ गया.

हौंठ सीं गर्दन हिलाना आ गया.
दोस्त ! जीने का बहाना आ गया.

जिन्दगी में गम मुझे इतने मिले,
अश्क पीकर.. मुस्कुराना आ गया.

ख्वाब सब आधे अधूरे रह गए,
दर्द सीने में ...बसाना आ गया.

दर्द के किस्से सुनाऊँ किस तरह,
गीत गज़लें गुनगुनाना आ गया.

साथ रहने का असर भी देखिये,
आप से बातें छिपाना आ गया.

हादसों ने पाल रख्खा है मुझे.
मौत से बचना बचाना आ गया.

बात मुद्दों पर नहीं हैं आजकल,
देखिये कैसा जमाना आ गया.

चीज हर बिकती मिली है इस शहर,
कीमतें मुझको चुकाना आ गया.

तू मिली तो दर्द गम सब छू हुए,
प्यार में पींगें बढ़ाना आ गया.
**हरिवल्लभ शर्मा 
दिनांक.08.09.2014

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on September 12, 2014 at 10:54pm

आदरणीय हरि वल्लभ भाई , नाम गलत लिख  देने के लिए क्षमा प्रार्थी हूँ , आगे से ख्याल रखूंगा |

Comment by harivallabh sharma on September 12, 2014 at 12:41am

आदरणीय गिरिराज भंडारी साहब हार्दिक आभार आपने ग़ज़ल के अशआरों पर स्नेह दिया...नाम हरिवल्लभ की जगह गोपाल भी स्नेहिल है ...बहुत आभार सादर.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on September 11, 2014 at 11:57pm

जिन्दगी में गम मुझे इतने मिले,
अश्क पीकर.. मुस्कुराना आ गया.

ख्वाब सब आधे अधूरे रह गए,
दर्द सीने में ...बसाना आ गया.  -     आदरणीय गोपाल भाई , बढ़िया ग़ज़ल और इन दो अशआर के लिए दिली बधाई |

Comment by harivallabh sharma on September 11, 2014 at 1:19am

मित्र आदरणीय ram shiromani pathak जी आपका उत्साहवर्धन हमें प्रेरक है...सदा स्वागत आपका.आभार.

Comment by harivallabh sharma on September 11, 2014 at 1:17am

आदरणीय Gumnaam pithoragarhi साहब बहुत शुक्रिया आपने हौसला बढाया ...हार्दिक आभार.

Comment by harivallabh sharma on September 11, 2014 at 1:16am

आदरणीय Dr. Vijai Shanker साहब आपका प्रतिसाद ग़ज़ल पर मिला आपका हार्दिक आभार.स्नेह बनाये रखें.

Comment by harivallabh sharma on September 11, 2014 at 1:14am

आदरणीय Dr Ashutosh Mishra जी ग़ज़ल पर आपकी हौसला अफजाई का बेहद शुक्रिया...इतनी सुन्दर समीक्षा कर लगभग हर अशआर को आपका स्नेह मिला...ग़ज़ल सार्थक हुयी आदरणीय बहुत आभार.

Comment by ram shiromani pathak on September 10, 2014 at 8:46pm
आहा मज़ा आ गया आदरणीय।। बहुत बधाई आपको
Comment by gumnaam pithoragarhi on September 10, 2014 at 7:36pm

वाह, खूबसूरत गजल के लिए बधाई।

Comment by Dr. Vijai Shanker on September 10, 2014 at 12:15pm
क्या बात है आदरणीय हरिबल्लभ शर्मा जी , बहुत कुछ कह डाला इन सुन्दर पंक्तियों में , बहुत बहुत बधाई

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