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माँ के माथे की बिन्दी

माँ के माथे की बिन्दी

गोल बड़ी सी बिन्दी

माथे पर कान्ति बन

खिलती है बिन्दी

माँ के माथे की बिन्दी

सजाती सवाँरती

पहचान बनाती बिन्दी

मान सम्मान

आस्था है बिन्दी

शीतल सहज सरल

कुछ कहती सी बिन्दी

माँ के माथे की बिन्दी

थकान मिटा,उर्जा बन

 मुस्काती बिन्दी

पावन पवित्र सतित्व की

 साक्षी है बिन्दी

परंपरा संस्कारों का

आधार है बिन्दी

माँ के माथे की बिन्दी

अपनी हिन्दी भी लगती

मुझको माँ की सी बिन्दी

हिन्दी है माँ भारती के

उज्जवल माथे की बिन्दी

उतनी ही सहज सरल

देश की पहचान है हिन्दी

माँ के माथे की बिन्दी

हिन्दी हिन्दी बस हिन्दी

***********

महेश्वरी कनेरी

मौलिक /अप्रकाशित

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Comment by Pawan Kumar on September 14, 2014 at 3:11pm

बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति ... बधाई सादर!

Comment by Maheshwari Kaneri on September 14, 2014 at 6:39am

आदरणीय खुर्शीद  जी उत्साह वर्धन के लिए आभार आप का

Comment by Maheshwari Kaneri on September 14, 2014 at 6:39am

आदरणीय आशुतोष जी उत्साह वर्धन के लिए आभार आप का

Comment by khursheed khairadi on September 13, 2014 at 10:04pm

आदरणीय माहेश्वरी जी बहुत सुन्दर भावाभिव्यक्ति है | कोटि बधाई स्वीकार करें 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on September 13, 2014 at 8:59pm

आदरणीया  माहेश्वरी जी बहुत ही सहज सरल मनभावन रचना के माध्यम से हिंदी को स्थापित करती शानदार रचना ..कविता का अंत जिस खूबसूरत तरीके से हुई है काबिले तारीफ़ है ...सादर बधाई के साथ 

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