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मोक्ष की अभिलाषा

मोक्ष की अभिलाषा

क्या मेरा जीवन निर्धारण
करेगी मेरी जन्म कुंडली
कर्म बंधेगा नव ग्रहों से
होगा भाग्य चक्र निर्धारित इनसे
मुझे नहीं जिज्ञासा
क्या लिख चुका
क्या लिख रहा विधाता
मैं अनंत का पंछी
मुझे नहीं मोक्ष की अभिलाषा

© हरि प्रकाश दुबे
"मौलिक व अप्रकाशित"

Views: 958

Comment

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Comment by Rahul Dangi Panchal on November 10, 2014 at 5:43am
बहुत सुन्दर ! वाह!
Comment by somesh kumar on November 9, 2014 at 5:05pm

मैं अनंत का पंछी मुझे नहीं मोक्ष को अभिलाषा ,सुंदर आ. बधाई 

Comment by ram shiromani pathak on November 9, 2014 at 2:16pm

सुन्दर प्रस्तुति आदरणीय//हार्दिक बधाई आपको 

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on November 9, 2014 at 1:16pm

दुबे जी

आपकी रचना अति सुन्दर है  i आपको शुरुआती दौर में ही बागी जी का आशीष मिला यह शुभ संकेत है i सादर

Comment by Hari Prakash Dubey on November 9, 2014 at 11:08am

आदरणीय श्री गणेश जी , आपका हार्दिक आभार, मैं अभी इस शानदार साईट पर नया हूँ ,कोशिश कर रहा हूँ ,आशा है आप से प्रोत्साहन मिलता रहेगा।

सादर,

हरि प्रकाश दुबे 


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on November 9, 2014 at 10:58am

जीवन निर्धारण
क्या करेगी जन्म कुण्डली,
नवग्रह बांधेंगे कर्म
निर्धारित करेंगे
भाग्यचक्र ?

मुझे नहीं जिज्ञासा
लिख चुका
या
लिख रहा विधाता,
मैं अनंत का पंछी
नहीं मोक्ष की अभिलाषा ।

वाह ! बहुत ही अच्छी कविता हुई है, भावों का सुन्दर सम्प्रेषण, बधाई आदरणीय हरी प्रकाश दुबे जी।

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