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करें कैसे भरोसा जिन्दगी का !
नहीं है आदमी जब आदमी का !!

नहीं फिर लूट पाता वो हमें भी !
वहाँ पर साथ होता गर किसी का !!

करे वो प्यार भी तो पागलो सा !
मगर ये खेल लगता दिल्लगी का

नहीं करता अगर हम को इशारे !
न होता सामना नाराजगी का !!

इबादत से डरे क्यों हम खुदा की !
मिले है रास्ता जब बंदगी का !!

अगर अपना समझ कर साथ में हो
भरोसा तो करो फिर दोस्ती का !!
.
मौलिक व अप्रकाशित

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Comment

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on November 11, 2014 at 4:02pm

बहुत खूबसूरत मतला आ० आलोक मित्तल जी 

आदरणीया राजेश जी ने जिस शेर पर अपनी बात कही है, उसमें मेरी भी उनसे सहमती है 

हार्दिक बधाई इस प्रस्तुति पर 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on November 11, 2014 at 9:11am

आदरणीय आलोक भाई , खूबसूरत गज़ल के लिये खूब सारी बधाइयाँ ।

Comment by vijay nikore on November 10, 2014 at 4:32pm

अच्छी गज़ल के लिए बधाई, आ० आलोक जी।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on November 10, 2014 at 1:39pm

वाह बहुत ही सुन्दर ग़ज़ल ,मतला बहुत प्रभाव शाली है 

एक संशय है इस शेर में ---

इबादत से डरे क्यों हम खुदा की !
मिले है रास्ता जब बंदगी का !!----- मिले है ----होना चाहिए या मिला है ---मिले है जैसे शब्द हम अक्सर बोलचाल में कह तो जाते हैं किन्तु  व्याकरण के हिसाब से तो मिलता है होता है ...यदि मिला है लिखें तो भी ये संशय समाप्त हो जाता है बाकि आप जैसा ठीक समझें ....वैसे शेर बहुत उत्कृष्ट है 

आपको बहुत-बहुत बधाई आलोक जी इस खूबसूरत ग़ज़ल के लिए| 

Comment by Alok Mittal on November 10, 2014 at 1:00pm

आद. योगराज प्रभाकर जी .....शुक्रिया आपका ..उसे दूर कर लूँगा ..ध्यान दिलाने का आपका आभार ..कृपया अपने सुझाव देते रहिएगा

Comment by Alok Mittal on November 10, 2014 at 12:57pm

आद. जितेन्द्र पस्टारिया जी...........आपका दिल से आभार ...आपने अपना समय दिया

Comment by Alok Mittal on November 10, 2014 at 12:57pm

आद. gumnaam pithoragarhi जी.....सादर आभार आपका आपने ग़ज़ल को समय दिया

Comment by Alok Mittal on November 10, 2014 at 12:56pm

आद. ram shiromani pathak जी....आपका बहुत बहुत आभार ...


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on November 10, 2014 at 11:34am

ग़ज़ल ठीक है लेकिन चौथे शेअर में तक़ाबुल-ए-रदीफैन का दोष है, इसे दूर करने का प्रयास करें।

Comment by Alok Mittal on November 10, 2014 at 11:21am

आदरणीय Er. Ganesh Jee "Bagi" जी...आपका सादर आभार

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