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आ चल बुने राष्ट्रीय स्वेटर (नवगीत )

आ चल बुने राष्ट्रीय स्वेटर

 

सहिष्णुता की ऊन का गोला

सलाइयाँ सद्व्यवहार  की   

 रंग रंग के  डालें बूटे

मनुसाई  कतारें  प्यार की

करें बुनाई सब मिलजुल कर

आ चल बुने राष्ट्रीय स्वेटर

 

अब सर्दी का लगा महीना

देश मेरा ये थर-थर काँपे

एक-एक मिल भरें उष्णता

शाल बना  कांधों पर ढापें

धूप-धूप गूँथे प्रभाकर      

आ चल बुने राष्ट्रीय स्वेटर

 

हिंदू मुस्लिम सिक्ख इसाई

साथ-साथ मिल करें सिलाई

अनुशासन का मिश्रित धागा

लोकतंत्र  की करें कढाई

ऐसे बने विचक्षण बुनकर

आ चल बुने राष्ट्रीय स्वेटर

 

 

ग्रंथि पड़े  तो मिलकर खोलें

हो अस्वच्छ तो मिलकर धोलें

ज्ञान समृद्धि के  फंदों में    

स्वच्छता के अंकुर बोलें

स्वास्थ्य तभी बनेगा बेहतर  

आ चल बुनें राष्ट्रीय स्वेटर

------------------

(मौलिक एवं अप्रकाशित )

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Comment

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on November 25, 2014 at 12:10pm

प्रिय छाया शुक्ला जी,आपको ये स्वेटर पसंद आया तो समझो मेरा लेखन सार्थक हो गया ,इस प्यारी प्रतिक्रिया हेतु दिल से आभार | 

Comment by Chhaya Shukla on November 25, 2014 at 11:57am

क्या बात है बहन राजेश जी
इस स्वेटर का तो बस इन्तजार ही था

सहिष्णुता की ऊन का गोला

सलाइयाँ सद्व्यवहार  की   

 रंग रंग के  डालें बूटे

मनुसाई  कतारें  प्यार की

करें बुनाई सब मिलजुल कर

आ चल बुने राष्ट्रीय स्वेटर

 शुरुआत ही इतनी प्यारी है कि पाठक वाचन को विवश हो उठेगा |
बधाई बहन सुंदर नवगीत के लिए |


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on November 25, 2014 at 11:17am

लक्ष्मण भैय्या आपको ये नवगीत रुचिकर लगा मेरा लिखना सार्थक हुआ दिल से आभारी हूँ |भैया  ये शब्द विचक्षण ही है जिसका अर्थ है निपुण ,सक्षम ,समर्थ .

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on November 25, 2014 at 11:00am

आदरणीय बहन राजेश जी एक बहुत ही सार्थक नवगीत हुआ है । कोटि कोटि बधाई । एक अनुरोध है तीसरे खंड की पांचवी पंक्ति में विचक्षण शब्द कही विलक्षण तो नहीं है स्पष्ट करें । शेष सादर.....


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on November 25, 2014 at 10:55am

आ० विजय निकोर जी,आपको नवगीत पसंद आया दिल से आभार आपका | 

Comment by vijay nikore on November 25, 2014 at 10:38am

अति सुन्दर नवगीत के लिए हार्दिक बधाई, आदरणीया राजेश जी।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on November 25, 2014 at 10:34am

आ० उमेश कटारा  जी ,आपकी टिपण्णी से अभिभूत हूँ हार्दिक धन्यवाद 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on November 25, 2014 at 10:30am

आ० गिरिराज जी,आपका बहुत- बहुत आभार .आपको नवगीत पसंद आया मेरा लिखना सार्थक हुआ | 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on November 25, 2014 at 10:28am

आ० गणेश बागी जी,प्रस्तुति आपकी प्रतिक्रिया पाकर धन्य हुई दिल से आभारी हूँ  


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on November 25, 2014 at 10:27am

आ० डॉ० गोपाल नारायण जी,आपकी प्रतिक्रिया से मेरी लेखनी को नव ऊर्जा प्राप्त होती है रचना पर आपका अनुमोदन पाकर मुग्ध हूँ ,दिल से शत- शत आभार ,सादर    

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