For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

शजर की हाय ही काफ़ी अगर बोला तो क्या होगा (ग़ज़ल 'राज')

1222  1222   1222  1222

नहीं होता तो क्या होता अगर होगा तो क्या होगा

कभी तुमने बचाया क्या अभी खोया तो क्या होगा

 

जमाने को सिखाया है हुनर तुमने यही अब तक

वफ़ा करके कभी खुद को मिले धोखा तो क्या होगा 

 

किसी की जिन्दगी में तुम उजाला कर नहीं सकते

अगर खुर्शीद भी दिन में न अब जागा तो क्या होगा 

 

चले हो आबशारों को जलाने आग से अपनी

समंदर ने तुम्हारा रास्ता रोका तो क्या होगा 

 

लिए वो हाथ में पत्थर कभी फेंका था जो तुमने 

तुम्हारा आईना दिल का  अगर टूटा तो क्या होगा 

 

बरी हो तुम भले  ही आज  अपने इन गुनाहों से

अदालत से ख़ुदा की फेंसला आया तो क्या होगा

 

बहुत बर्दाश्त करता है न कहता कुछ जुबाँ से वो

शजर की हाय ही काफ़ी अगर बोला तो क्या होगा

(मौलिक एवं अप्रकाशित )

Views: 909

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on December 16, 2014 at 11:04am

मिथिलेश जी सच कहा ये  बड़ी मक़्बूल बह्र है मेरी पसंदीदा भी है|ग़ज़ल पर आपकी प्रतिक्रिया से अभिभूत हूँ आप जैसे ग़ज़लकार को इस ग़ज़ल ने पाठक के रूप में पाया तथा अशआर अपनी बात स्पष्ट रख सके, मेरा लेखन कर्म सार्थक हुआ तहे दिल से आभारी हूँ 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on December 15, 2014 at 11:28pm

नहीं होता तो क्या होता अगर होगा तो क्या होगा

कभी तुमने बचाया क्या अभी खोया तो क्या होगा

क्या बात है पढ़कर झूम गया हूँ ... बह्र-ए-हज़ज बड़ी ही मक़्बूल बहर है इस बह्र में काफ़ी ग़ज़ल भी कही गई है, मैंने इस बहर में बहुत लिखा है पर आपका ये कलाम ...क्या कहूँ बस झूम गया हूँ ..... इसे गुनगुनाने में वही आनंद आ रहा है  जो चचा ग़ालिब की ग़ज़ल को जगजीत सिंह जी की आवाज़ में सुनते हुए आता है ... बस कमाल ... बधाई क्या दूं ...नमन करता हूँ आपको 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on November 22, 2014 at 10:26am

प्रिय वन्दना,ग़ज़ल पर आपकी प्रतिक्रिया से अभिभूत हूँ ,मेरा लिखना सार्थक हुआ तहे दिल से आभारी हूँ  शुभकामनायें. 

Comment by vandana on November 22, 2014 at 4:57am

किसी की जिन्दगी में तुम उजाला कर नहीं सकते

अगर खुर्शीद भी दिन में न अब जागा तो क्या होगा 

 

चले हो आबशारों को जलाने आग से अपनी

समंदर ने तुम्हारा रास्ता रोका तो क्या होगा

 

बहुत बर्दाश्त करता है न कहता कुछ जुबाँ से वो

शजर की हाय ही काफ़ी अगर बोला तो क्या होगा

वाह कमाल की ग़ज़ल आदरणीया 

 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on November 21, 2014 at 9:23pm

तहे दिल से आभार आ० मुकेश श्रीवास्तव जी |

Comment by MUKESH SRIVASTAVA on November 21, 2014 at 10:19am

 

baut umdaa mitra -


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on November 20, 2014 at 7:15pm

हरि प्रकाश जी ,ग़ज़ल आपको पसंद आई मेरा लेखन कर्म सार्थक हुआ ,तहे दिल से आभार आपको. 

Comment by Hari Prakash Dubey on November 20, 2014 at 5:23pm

बरी हो तुम भले  ही आज  अपने इन गुनाहों से

अदालत से ख़ुदा की फेंसला आया तो क्या होगा....बहुत सुन्दर रचना ,आपको हार्दिक बधाई 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on November 19, 2014 at 8:41pm

बहुत- बहुत शुक्रिया आ० गुमनाम पिथौरागढ़ी जी 

Comment by gumnaam pithoragarhi on November 19, 2014 at 7:54pm

वाह क्या बात है ,,,

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
20 hours ago
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी को मिलकर ओबीओ को बचाने का सतत प्रयास करते रहना चाहिए।"
Thursday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"आ.भाई विजय जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर रचना हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Thursday
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"atyant dukahd "
Sep 11
जगदानन्द झा 'मनु' replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय, प्रणाम संगहि संग हार्दिक धन्यवाद। अपनेक मार्गदर्शन पाबि बहुत बेसी मोटिवेशन आ सीखक मिलैए…"
Sep 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय जगदानन्द झा मनु जी, अहाँ बड्ड नीक गजल पठेलियै. सबसे पहिल, त हम प्रयुक्त भेल बहरक विषय में…"
Aug 18
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत हरिगीतिका छंद पर आपकी प्रतिक्रिया से सृजन सफल हुआ है. आपके…"
Aug 15
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी सादर, प्रस्तुत छंदों पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार.…"
Aug 15
जगदानन्द झा 'मनु' added 2 discussions to the group मैथिली साहित्य
Aug 10
Shyam Narain Verma commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"नमस्ते जी, बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर"
Aug 6

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service