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दर्द भरी सौगात मिली है

दर्द भरी सौगात मिली है।
तनहाई की रात मिली है।।

तेरे दिल में महफूज़ रहा।
ऐसी कोई बात मिली है।।

जिनके कारण जग से लड़ता।
उनसे ही अब मात मिली है।।

उनकी प्यास बुझाता कैसे।
खारेपन की जात मिली है।।

दर्द को ही तकिया बनाया।
ग़मों से अब निजात मिली है।।
*************************
-राम शिरोमणि पाठक
मौलिक/अप्रकाशित

Views: 282

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Comment by ram shiromani pathak on November 29, 2014 at 3:17pm

राहुल भाई बहुत बहुत आभार आपका 

Comment by Hari Prakash Dubey on November 28, 2014 at 11:44pm

सुन्दर रचना  राम शिरोमणि पाठक जी ,बधाई आपको !

Comment by Rahul Dangi on November 28, 2014 at 5:42pm
बहुत सुन्दर वाह!
Comment by ram shiromani pathak on November 28, 2014 at 9:44am
भाई सोमेश कुमार जी बहुत बहुत आभार आपका
Comment by somesh kumar on November 28, 2014 at 9:24am

जिनके कारण जग से लड़ता।
उनसे ही अब मात मिली है।।

उनकी प्यास बुझाता कैसे।
खारेपन की जात मिली है।।

रिश्तों कि तह खोलती सुंदर पंक्तियाँ |सम्पूर्ण रचना ही सुंदर है 

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