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नवगीत : तुम अब तक भूखे हो?

एक प्रयास ...नवगीत : तुम अब तक भूखे हो?

हम सबको तो मिला चबैना,
तुम अब तक भूखे हो?
बंटता खूब चुनावी चंदा,
तुम अब तक रूखे हो?

पंजा वाले, सइकल वाले,
कुछ हाथी वाले थे.
खिले फूल थे, दीवारों पर,
सब अपने वाले थे.
बटी बोतलें गली गली में,
तुम अब तक छूछे हो? 

हम सबको तो मिला चबैना,

तुम अब तक भूखे हो?

हाथों हाथ उठा दद्दा को,
कम्बल नया उढाया.
कबरे कुत्ते के मरने का,
उनने शोक जताया.
खूब बही वादों की गंगा,
तुम अब तक सूखे हो.
हम सबको तो मिला चबैना,
तुम अब तक भूखे हो?

लगे पोस्टर, फटे पोस्टर,
जात- पांत के दंगे.
भाई भतीजों में बंटवारे,
घर-घर भड़के पंगे.
हार-जीत कर, गले मिले वे, 
तुम अब तक रूठे हो?
हम सबको तो मिला चबैना,
तुम अब तक भूखे हो?
**हरिवल्लभ शर्मा दि.06.12.2014

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

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Comment

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Comment by harivallabh sharma on December 20, 2014 at 1:22am

आदरणीय गिरिराज भंडारी जी आपका कुशल मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन सतत मिलता रहे हार्दिक आभार..सादर.

Comment by harivallabh sharma on December 20, 2014 at 1:20am

आदरणीय योगराज प्रभाकर जी आपका कुशल मार्गदर्शन हमें सार्थकता प्रदान करता है...कुशल मीमांसा हेतु हार्दिक आभार..निश्चित ही हमें उत्तम दिशा निर्देश देकर भविष्य के लिए सचेत भी किया है, सादर नमन.

Comment by harivallabh sharma on December 20, 2014 at 1:16am

आदरणीय somesh kumar जी सार्थक प्रोत्साहित करती टीप हेतु हार्दिक आभार आपका...सादर.

Comment by harivallabh sharma on December 20, 2014 at 1:14am

आदरणीय Saurabh Pandey जी हार्दिक आभार आपका अनुमोदन अति उत्साहित करता है..हार्दिक आभार कृपया अनुग्रह बनाये रखें...सादर.

Comment by harivallabh sharma on December 20, 2014 at 1:12am

आदरणीया rajesh kumari जी इस अदना के प्राथमिक प्रयास पर एक सशक्त हस्ती के स्मरण कराने का आपका प्रोत्साहन स्तुत्य है...हौसला बढ़ाने हेतु आपका हार्दिक आभार..सादर..

Comment by harivallabh sharma on December 20, 2014 at 1:08am

आदरणीय Er. Ganesh jee "Bagi" जी आपकी प्रोत्साहित करती टीप से रचना धर्मिता को बल मिला ,आपका हार्दिक आभार कृपया स्नेह बनाये रखें सादर.

Comment by harivallabh sharma on December 20, 2014 at 1:05am

आदरणीय Dr. Vijai Shanker जी आपने नव गीत पर सार्थक   टीप देकर आत्मीयता दी..आपका हार्दिक आभार..अनुग्रह बनाये रखें..सादर.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on December 10, 2014 at 8:04pm

आदरनीय हरि वल्लभ भाई , बहुत सुन्दर सार्थक  रचना के लिये बधाई !


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on December 9, 2014 at 11:46am

नवगीत पर बहुत सुन्दर प्रयास है आ० हरिवल्लभ शर्मा जी। बिम्ब और प्रतीक क्योंकि नवगीत की जान माने जाते हैं तो ऐसे में "पंजा वाले", "सइकल वाले" तथा "हाथी वाले" शब्द सपाटबयानी लग रहे हैं। बहरहाल, हार्दिक बधाई स्वीकारें।

Comment by somesh kumar on December 9, 2014 at 10:25am

राजनैतिक हलचलों ,चुनावों पर सार्थक व्यंग्य कविता 

कृपया ध्यान दे...

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