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मौसम भी नीर बहायेगा ………….

मौसम भी नीर बहायेगा …

भोर होते ही
चिड़ियों का कलरव
इक पीर जगा जाएगा
सांझ होते ही सूनेपन से
हृदय पिघल जाएगा
मुक्त- केशिनी का संबोधन
इक छुअन की याद दिलायेगा
बिना पिया के राह का हर पग
अब बोझिल हो जाएगा
निष्ठुर पवन का वेग भला
कैसे दीप सह पायेगा
रैन बनी अब हमदम तुम बिन
चिरवियोग तड़पायेगा
जाने जीवन के पतझड़ में
मधुमास कब आयेगा
अश्रु बूंदों से तब तक दिल का
स्मृति आँगन गीला हो जाएगा
प्राण प्रिय तुम प्राण मेरे हो
रुष्ट न होना मुझसे तुम
सिसकती साँस की स्वर लहरी से तो
मौसम भी नीर बहायेगा

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by Sushil Sarna on December 18, 2014 at 7:40pm

आदरणीय   मिथिलेश वामनकर    जी रचना पर आपकी स्नेहिल अभिव्यक्ति का तहे दिल से शुक्रिया।

Comment by Sushil Sarna on December 18, 2014 at 7:40pm

आदरणीय  शिज्जु "शकूर"   जी रचना पर आपकी स्नेहिल अभिव्यक्ति का तहे दिल से शुक्रिया।

Comment by Sushil Sarna on December 18, 2014 at 7:39pm

आदरणीय  vijay nikore  जी रचना पर आपकी स्नेहिल अभिव्यक्ति का तहे दिल से शुक्रिया।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on December 17, 2014 at 11:11pm

इस बेहतरीन, सुन्दर और भाव पूर्ण रचना के लिये आपको बधाइयाँ आदरणीय सुशील सर 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on December 17, 2014 at 8:42pm

आदरणीय सुशील सरना सर बहुत ही सुंदर भावपूर्ण रचना है सादर बधाई 

Comment by vijay nikore on December 16, 2014 at 9:40pm

अति सुन्दर भाव-प्रधान रचना। बधाई।

Comment by Sushil Sarna on December 16, 2014 at 7:04pm

आदरणीया  rajesh kumari    जी रचना पर आपकी आत्मीय प्रशंसात्मक  अभिव्यक्ति का तहे दिल से शुक्रिया। 

Comment by Sushil Sarna on December 16, 2014 at 7:03pm

आदरणीय   Dr. Vijai Shanker   जी रचना पर आपकी स्नेहिल अभिव्यक्ति का तहे दिल से शुक्रिया

Comment by Sushil Sarna on December 16, 2014 at 7:02pm

आदरणीय  डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव  जी रचना पर आपकी स्नेहिल अभिव्यक्ति का तहे दिल से शुक्रिया।

Comment by Sushil Sarna on December 16, 2014 at 7:01pm

आदरणीय Shyam Narain Verma   जी रचना पर आपकी स्नेहिल अभिव्यक्ति का तहे दिल से शुक्रिया। 

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