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ग़ज़ल ................... गुमनाम पिथौरागढ़ी

१२२२  १२२२ १२

है उसकी याद बादल की तरह

भटकता हूँ मैं पागल की तरह

हवास व्यापार के नाले हैं यहाँ

मुहब्बत थी गंगाजल की तरह

ये जीवन हादसों का मलवा है

किसी बेवा के आँचल की तरह

हुई नाकाम कोशिश भूलने की

थी तेरी याद दल दल की तरह

है चुप का रूप गोया ताज हो

है उसकी बात कोयल की तरह

मौलिक व अप्रकाशित

गुमनाम पिथौरागढ़ी

Views: 512

Comment

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Comment by ajay sharma on December 26, 2014 at 11:29pm

uttam atiuttam 

Comment by gumnaam pithoragarhi on December 22, 2014 at 5:07pm

बहुत शुक्रिया सर ,,,,, कोशिश करूंगा कि गलतियां कम से कम हों

Comment by Anurag Prateek on December 22, 2014 at 6:37am

किसी की याद बादल की तरह १२२२ १२२२ १२ 

भटकता हूँ मैं पागल की तरह

हवस  व्यापार के नाले जहाँ,    / हैं- फालतू है 

मुहब्बत पाक आँचल की तरह = गंगाजल- २२२  हैं / थी 

 

ये जीवन हादसों का मलवा है   १२२२   १२२२  २२ 

किसी बेवा के आँचल की तरह

ये जीवन हादसों की नींव पर

रही जंजीर- सांकल की तरह 

हुई नाकाम कोशिश भूलने की १२२२   १२२२  १ २२

बहुत कोशिश किये भूलूँ मगर 

तुम्हारी याद दल दल की तरह

कि चुप का रूप गोया ताज हो

वो जिसकी बात कोयल की तरह

Comment by somesh kumar on December 20, 2014 at 7:46pm

ये जीवन हादसों का मलवा है

किसी बेवा के आँचल की तरह|

सुंदर गज़ल 

Comment by gumnaam pithoragarhi on December 20, 2014 at 6:53pm
धन्यवाद दोस्तो
Comment by Hari Prakash Dubey on December 20, 2014 at 6:32pm

है उसकी याद बादल की तरह

भटकता हूँ मैं पागल की तरह......बहुत खूब आदरणीय गुमनाम पिथौरागढ़ी जी ,बधाई !

Comment by Shyam Narain Verma on December 20, 2014 at 9:57am

 हार्दिक बधाई स्वीकारें इस सुन्दर ग़ज़ल के लिए


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on December 20, 2014 at 12:49am

सुन्दर रचना ... बधाई आपको 

है उसकी याद बादल की तरह

भटकता हूँ मैं पागल की तरह...........बेहतरीन 

कृपया ध्यान दे...

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