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ग़ज़ल - दिल में सुलगा हुआ शरर देखा ( गिरिराज भंडारी )

२१२२    १२१२    २२ /११२

फिर  से उगता हुआ  जो पर देखा

तो बहुत  झूम  झूम   कर  देखा

 

धूप  में  झुलसा  हर  बशर  देखा   

तन  पसीने  से  तर ब तर  देखा

 

जल  सके  आग,  कोशिशें   देखीं

दिल  में  सुलगा  हुआ शरर  देखा

 

कारवाँ   साथ  था  चला   लेकिन

खुद को ही खुद का हम सफ़र देखा

 

सर परस्ती   रही   सियासत  की

ज़ुर्म  कर जो   झुका न सर  देखा

 

हद  के  बाहर  दुआ  में हाथ  उठे  

हर  , अमल  में  बहुत कसर देखा

 

ताज  में ताब  थी या  सर में  थी  

जाना, जब  सर को बे असर  देखा

 

आदतें     छोड़ती    नहीं   यारों

पीछे  आतीं  हैं, भाग  कर   देखा

*******************************

मौलिक एअव अप्रकाशित

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Comment

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 15, 2015 at 8:32am

आदरणीया प्राची जी , लम्बे अंतराल के बाद आपको मंच मे फिर से सक्रिय देख बहुत अच्छा लगा ।

ग़ज़ल पर आपकी उत्साह वर्धन करती प्रतिक्रिया के लिये आपका हार्दिक आभार ।


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on January 14, 2015 at 11:46pm

बहुत सुन्दर ग़ज़ल कही आ० गिरिराज भंडारी जी 

सभी अशआर पसंद आये , लेकिन 

कारवाँ   साथ  था  चला   लेकिन

खुद को ही खुद का हम सफ़र देखा..........इस शेर के लिए तो बहुत बहुत बधाई 

सादर.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 14, 2015 at 1:31pm

आदरणीय ख़ुर्शीद भाई , हौसला अफज़ाई का तहे दिल शुक्रिया , नज़रे करम बनाये रखें ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 14, 2015 at 1:30pm

आदरणीया राजेश जी ,आपकी सराहना ने मेरे प्रयास को पूर्णता प्रदान कर दी , आपका दिल से आभारी हूँ ।

Comment by khursheed khairadi on January 14, 2015 at 11:43am

धूप  में  झुलसा  हर  बशर  देखा   

तन  पसीने  से  तर ब तर  देखा

 

जल  सके  आग,  कोशिशें   देखीं

दिल  में  सुलगा  हुआ शरर  देखा

आदरणीय गिरिराज सर उम्दा ग़ज़ल हुई है |सभी अशहार मनभावन लगे |सादर अभिनन्दन |


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on January 14, 2015 at 10:40am

कारवाँ   साथ  था  चला   लेकिन

खुद को ही खुद का हम सफ़र देखा---बहुत खूब 

आदतें     छोड़ती    नहीं   यारों

पीछे  आतीं  हैं, भाग  कर   देखा--क्या कहने 

बहुत सुन्दर ग़ज़ल हुई हार्दिक बधाई आ० गिरिराज जी 

 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 14, 2015 at 9:59am

आदरणीया प्रतिभा जी , हौसला अफज़ाई के लिये आपका बहुत शुक्रिया ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 14, 2015 at 9:58am

आदरणीय राहुल भाई , सराहना के लिये आपका आभार ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 14, 2015 at 9:58am

आदरणीय लक्ष्मण धामी भाई , उत्साह वर्धन के लिये बहुत आभार ।

Comment by Rahul Dangi Panchal on January 13, 2015 at 1:58pm
बहुत सुन्दर गजल आदरणीय!

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