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“भारतीय कुत्ता” (लघुकथा)

“अरे यार ओबामा साहब के रास्ते में कुत्ता आ गया, सुरक्षा व्यवस्था में भयंकर चूक हो गयी, अगर उसमें बम लगा होता तो?”

“कुछ नहीं यार “भारतीय कुत्ता” था, जान दे देता पर ओबामा साहब को कुछ नहीं होने देता, यार देश की इज्ज़त का सवाल था आखिर ।" जय हिन्द !

 

हरि प्रकाश दुबे

"मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by Hari Prakash Dubey on January 27, 2015 at 10:48pm

आदरणीय जितेन्द्र पस्टारिया साहब आशीष यूँ ही बनाये रखिये आपका आभार ! सादर 

Comment by Hari Prakash Dubey on January 27, 2015 at 10:36pm

हा.. हा...हा .आदरणीय खुर्शीद जी, सही बात कही आपने ,आनंद आ गया ,आपका आभार ! सादर   

 

Comment by Hari Prakash Dubey on January 27, 2015 at 10:32pm

आदरणीय सौरभ पाण्डेय सर , मार्गदर्शन के लिए आपका हृदय से आभारी हूँ । सादर !


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on January 27, 2015 at 9:00pm

// हमारे यहाँ सुरक्षाकर्मी जब भी मिलते हैं या विदा लेते हैं तो इस शब्द का ही प्रयोग करतें है, इसीलिए आवश्यक महसूस हुआ ! //

उपरोक्त प्रस्तुति में अभिव्यक्त संवादों से यह कहीं ज़ाहिर नहीं हो रहा कि परस्पर संवाद दो सुरक्षाकर्मियों के हैं. इसीकारण लघुकथा का बहाव तिर्यक हुआ लगा.

लघु कथा में शब्दों की मितव्ययिता आवश्यक है लेकिन संप्रेषणीयता से कोई समझौता किये बग़ैर.
शुभेच्छाएँ.

Comment by Hari Prakash Dubey on January 27, 2015 at 8:45pm

आदरणीय गिरिराज सर,आपकी उत्साहवर्धक और प्रेरणादायी टिप्पणी के लिए हृदय से धन्यवाद आभार।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 27, 2015 at 8:24pm

आदरणीय हरि भाई , एक सम सामयिक घटना पर बढ़िया लघु कथा के लिये बधाई । 

Comment by Hari Prakash Dubey on January 27, 2015 at 8:11pm

 आदरणीय विनय जी आपका बहुत बहुत शुक्रिया।

Comment by Hari Prakash Dubey on January 27, 2015 at 7:44pm

आदरणीय विनोद जी, आदरणीय सौरभ पाण्डेय सर रचना पर आपकी उपस्थिति  और आपकी उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार !जहां तक जय हिन्द का तात्पर्य है , हमारे यहाँ सुरक्षाकर्मी जब भी मिलते हैं या विदा लेते हैं तो इस शब्द का ही प्रयोग करतें है, इसीलिए आवश्यक महसूस हुआ ! पुनः आभार , सादर ! 

Comment by Hari Prakash Dubey on January 27, 2015 at 7:32pm

आदरणीया कांता जी आपकी उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार सादर धन्यवाद !

Comment by Hari Prakash Dubey on January 27, 2015 at 7:28pm

आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी, आपका बहुत - बहुत धन्यवाद ! सादर

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