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गुनगुन करती थी सदा

वो एक लड़की ..

खिड़की से आती थी नज़र

वो एक लड़की

कभी नाचती गुड़िया संग

कभी लगाती गुलाबी रंग

बाबा के कंधों पर चढ़

दुनिया थी देखती

माँ की बाहों में झुला झूलती

समय उपरान्त

उसी खिड़की में

आई  नज़र

वो एक लड़की

ले रंगबिरंगी चुनर

पूरियाँ तलती थी  

बाबा को बिस्तर पर सुला

माथा सहलाती 

वो एक लड़की...

बहुत दिनों से

बंद थी खिड़की

नहीं आती नजर अब

वो एक लड़की

आज खुली खिड़की और

दिखी वो एक लड़की ?

माथे बिंदिया चमक रही थी

चूड़ियाँ भी खनक रही थी

मगर चेहरा कुछ बुझा सा था

ग़मगीन और उदासीन

दिखी आज

वो एक लड़की...

साल कुछ बीते और..  

खिड़की बंद हो गयी

सदा के लिए

नहीं दिखती अब ..

वो चहकती  लड़की

क्यूंकि दहेज़ की भेंट

चढ़ चुकी थी

वो एक लड़की...

डिम्पल गौर 'अनन्या '

(मौलिक और अप्रकाशित ).

 

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Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on February 11, 2015 at 1:23pm

आदरणीया डिंपल  जी

आपके कविता  मार्मिक है i आपको बधाई i

Comment by डिम्पल गौड़ on February 11, 2015 at 12:52am

कविता की सराहना करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद  आदरणीय डॉ विजय शंकर जी ..

Comment by Dr. Vijai Shanker on February 10, 2015 at 6:33am
सुन्दर प्रस्तुति, बधाई, सादर।
Comment by डिम्पल गौड़ on February 10, 2015 at 12:37am

आभार ..सोमेश कुमार जी 

Comment by डिम्पल गौड़ on February 10, 2015 at 12:36am

धन्यवाद आदरणीय आलोक मित्तल जी |

Comment by somesh kumar on February 9, 2015 at 10:48pm

वो एक लड़की ,हर उस लड़की की बयानी ,जो बचपन में अपने घर पे खेलती -कूदती पलती है और एक दिन - - - - - सुंदर मर्मान्तक भाव -सयोंजन |

Comment by Alok Mittal on February 9, 2015 at 11:12am

बहुत सुंदर आपकी रचना ..हर पहलू को ख़ूबसूरती से कहा है आपने 

Comment by डिम्पल गौड़ on February 9, 2015 at 1:02am

आप सभी मित्रगणों के स्नेह आशीष और बेहद सुन्दर प्रतिक्रियाओं  ने मुझे अभिभूत कर दिया है ..एक रचनाकार के लिए  इससे बड़ी   ख़ुशी की बात और क्या होगी .| आप सभी आदरणीय गुरुजनों का आशीष यूँ ही मिलता रहे यही अभिलाषा है | एक बार पुनः ह्रदय तल से आभार व्यक्त करती हूँ ..|

Comment by Dr Ashutosh Mishra on February 8, 2015 at 9:21pm

आदरणीया जी .मन को उद्देलित कर देने वाली इस रचना के लिए आपको ढेरों बधाई सादर 

Comment by Hari Prakash Dubey on February 8, 2015 at 7:02pm

आदरणीया डिम्पल गौर 'अनन्या ' जी सुन्दर एवम् मार्मिक रचना, एक लड़की की कथा को आपने कविता में खूबसूरती से पिरो दिया ,  आपको हार्दिक बधाई ,सादर .

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