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गज़ल -- कोई मर जाये, गर कभी जी ले ( गिरिराज भंडारी )

2122  1212   22 

ज़िन्दगी दी ख़ुदा ने प्यारी है 

चाहतें पर बहुत उधारी है

 

इस तरफ़ हम खड़े उधर अरमाँ

बेबसी बस लगी हमारी है

 

ख़्वाब तो रोज़ ही बुनें,  लेकिन

हर हक़ीकत लिये कटारी है

 

ख़र्च का क़द बढ़ा है रोज़ मगर

रिज़्क की शक़्ल माहवारी है

 

रिश्ते बदशक़्ल हो गये अपने

पेट की आग सब से भारी है

      

फुनगियों में लटक रहे अरमाँ

कोई सीढ़ी नहीं , न आरी है

 

तिश्नगी अश्क़ भी पिये कैसे

आँसुओं की नदी भी खारी है

 

ऐ ख़ुदा ! सिर्फ ग़म की कूँची से

मेरी तस्वीर क्यूँ उतारी है

 

कोई मर जाये, गर कभी जी ले

ज़िन्दगी मैनें जो गुज़ारी है

 

ज़िन्दगी फिर भी जी रही है तू  

बस यही बात तेरी प्यारी है  

**************************** 

मौलिक एवँ अप्रकाशित

 

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Comment by गिरिराज भंडारी on March 19, 2015 at 11:01pm

आदरणीय मिथिलेश भाई , हौसला अफज़ाई का बहुत शुक्रिया ॥


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on March 19, 2015 at 11:00pm

आदरणीय शिज्जु भाई सराहना के लिये आपका हार्दिक आभार । आपका अन्दाजा सही है , ये गज़ल बहुत जल्दबाजी में कही है , आपका अन्दाजा काबिले तारीफ है ॥


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on March 19, 2015 at 10:58pm

आदरणीय श्याम भाई , उत्साह वर्धन के लिये आपका बहुत आभार ।

Comment by ajay sharma on March 19, 2015 at 10:46pm

कोई मर जाये, गर कभी जी ले

ज़िन्दगी मैनें जो गुज़ारी है...........great .......great ...........great ...tahir saab ka sher ......yaad aa gaya ...zindagi tere taaqqub me ham itna chalte hai ki mar jate hai .......... 

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on March 19, 2015 at 9:33pm

कोई मर जाये, गर कभी जी ले

ज़िन्दगी मैनें जो गुज़ारी है--------------अति सुन्दर भाई गिरिराज जी  . सादर .

 

Comment by Nirmal Nadeem on March 19, 2015 at 9:25pm
बहरे ख़फ़ीफ़ मेरी पसंदीदा बहर है ज़िन्दगी की पहली ग़ज़ल मैंने इसी बहर में कही थी। बहुत ही प्यारी ग़ज़ल हुई है आदरणीय। मुबारक हो।

आप का ध्यान मतले के रदीफ़ पे चाहूँगा एक बार पुनः देख ले। सादर।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on March 19, 2015 at 9:02pm

आदरणीय गिरिराज सर, अच्छी ग़ज़ल और सच्ची ग़ज़ल ... छोटी बह्र में सीधी बात .... सुन्दर ग़ज़ल हेतु हार्दिक बधाई 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on March 19, 2015 at 8:39pm

आदरणीय गिरिराज सर अच्छी ग़ज़ल है सादर बधाई आपको, पर ये जल्दबाज़ी में लिखी गई मालूम होती है.

Comment by Shyam Mathpal on March 19, 2015 at 7:11pm

आदरणीय गिरिराज जी,

हर लॅब्ज दिल को छू गया. क्या कहने . बहुत खूब. दिली बधाई.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on March 19, 2015 at 6:24pm

आदरणीय गुमनाम भाई , हौसला अफज़ाई का बेहद शुक्रिया ॥

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