For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल :- जैसे.मिरे अंदर से ख़ुदा बोल रहा है

बह्र :- मफ़ऊल मफ़ाईल मफ़ाईल फ़ऊलुन


सच बोल रहा हूँ तो ये महसूस हुवा है
जैसे मिरे अंदर से ख़ुदा बोल रहा है

समतों क तअय्युन है न मंज़िल का पता है
इंसान मशीनों की तरह भाग रहा है

ठहरे हुए पानी पे कोई नाव रुकी है
इक गीत फ़ज़ाओं में अभी गूंज रहा है

इस हद पे हैं तहज़ीब की मिटती हुई क़दरें
रिश्तों को ज़मीनों की तरह बाँट दिया है

जिस दिन से दरिन्दों की सिफ़त आई है इसमें
इंसान ख़ुद अपना ही लहू चाट रहा है

फैले हुए हाथों पे "समर" तंज़ न करना
क्या जानिये बेचारे पे क्या वक़्त पड़ा है

"समर कबीर"
मौलिक/अप्रकाशित

Views: 1011

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Samar kabeer on April 14, 2015 at 2:55pm
बहना राजेश कुमारी जी,आदाब,सुख़न नवाज़ी के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ |
"सम्त" यानी "दिशा" ,"समतों" यानी दिशाओं,"तअय्युन" यानी मुक़र्रर करना ( तय करना) ,"समतों का तअय्युन" यानी दिशाओं का तय करना , आगे से मैं कठिन शब्दों का अर्थ लिख दिया करूँगा ताकि पढ़ने वालों को आसानी हो |

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on April 14, 2015 at 10:49am

ठहरे हुए पानी पे कोई नाव रुकी है
इक गीत फ़ज़ाओं में अभी गूंज रहा है---वाह्ह्ह्ह उम्दा 

इस हद पे हैं तहज़ीब की मिटती हुई क़दरें
रिश्तों को ज़मीनों की तरह बाँट दिया है------क्या कहने लाजबाब 

आ० समर भाई जी ,शानदार ग़ज़ल हुई तहे दिल से दाद दे रही हूँ 

यदि निम्न शब्दों का अर्थ पता चले तो पढने का लुत्फ़ दुगुना हो जाएगा  

जैसे --समतों क तअय्युन ??

Comment by Samar kabeer on April 14, 2015 at 10:46am
जनाब गिरिराज भंडारी जी,आदाब,सुख़न नवाज़ी के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ |
Comment by Samar kabeer on April 14, 2015 at 10:44am
जनाब मिथिलेश वामनकर जी,आदाब,हौसला अफ़ज़ाई के लिये तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ |
Comment by Samar kabeer on April 14, 2015 at 10:42am
जनान "जान" गोरखपुरी साहिब,आदाब,ज़र्रा नवाज़ी के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ|
"सम्त" यानी "दिशा","समतों" यानी दिशाओं,आपने ठीक कहा आइन्दा कठिन शब्दों के अर्थ लिख दिया करूँगा |
Comment by Samar kabeer on April 14, 2015 at 10:30am
जनाब दिनेश कुमार जी,आदाब,सुख़न नवाज़ी के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ |

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on April 14, 2015 at 8:29am

आदरणीय समर भाई , मतला खूब पसंद आया , पूरी ग़ज़ल और मतले के लिये विशेष तौर पर आपको हार्दिक बधाइयाँ ॥


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on April 14, 2015 at 7:37am
आदरणीय समर कबीर जी हमेशा की तरह एक बेहतरीन ग़ज़ल। दिल से दाद हाज़िर है।
Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on April 13, 2015 at 10:24pm

बेहतरीन गज़ल! मतला उम्दा!शेर दर शेर दाद हाजिर है आदरणीय समर सरजी!

फैले हुए हाथों पे "समर" तंज़ न करना
क्या जानिये बेचारे पे क्या वक़्त पड़ा है      लाजवाब मक्ते के लिए अलग से दाद कबूल फरमाए आदरणीय!

आ० समर सर एक अनुरोध है कि आपकी गजल में प्रयोग होने वाले कठिन शब्दों के अर्थ भी दे दिया करे!(ख़ासकर फ़ारसी शब्दों के) ताकि हमें समझने में आसानी रहे और शब्दकोश भी बढे!सादर! समंतो शब्द का अस्ल अर्थ नही मालूम मुझे,बस अंदाजन समझने की कोशिश की!

Comment by दिनेश कुमार on April 13, 2015 at 6:58pm
बहुत ही उम्दा ग़ज़ल हुई है आदरणीय समर कबीर सर । लाजवाब मतला,दीगर अशआर भी बहुत प्रभावशाली। वाह वाह वाह। मुबारक सर जी।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
1 hour ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
11 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
15 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
yesterday
Sushil Sarna posted blog posts
Tuesday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
Tuesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रामबली गुप्ता's blog post कर्मवीर
"कर्मवीरों के ऊपर आपकी छांदसिक अभिव्यक्ति का स्वागत है, आदरणीय रामबली गुप्त जी.  मनहरण…"
Tuesday
Jaihind Raipuri posted a blog post

ग़ज़ल

2122    1212    22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत मेंक्या से क्या हो गए महब्बत में मैं ख़यालों में आ गया उस…See More
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service