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कर्त्तव्यो की अजब कहानी...

कर्त्तव्यो की अजब कहानी, जीवन भर करता नादानी।

भूख लगे तो चिल्लाता यों, सारे जग का मालिक है वो।
शोषण का अपराध हृदय में, खोखल तना घना लगता वो।।
हाथ, पैर, मुख कर्म करे पर, अॅखियॉं मूंद करे बचकानी।
कर्त्तव्यो की अजब कहानी, जीवन भर करता नादानी।। 1

दया-करूण की ममता देवी, निश्छल अन्तर्मन की वेदी।
नहीं जरा भी रूक पाती है, करूणा-ममता बरसाती है।।
जीवन भर उल्लास बॉंट कर, पीती सदा नयन से पानी।
कर्त्तव्यो की अजब कहानी, जीवन भर करता नादानी।। 2

बड़ा हुआ तो तेरा मेरा, सम्बन्धों का जाल घनेरा।
छिछले, लिजलिज अवयव से नित, काम लोभ के साधे निज हित।।
देह रिक्त बिन प्राण पखेरू, फिर भी पंख नोचता दानी।
कर्त्तव्यो की अजब कहानी, जीवन भर करता नादानी।। 3

प्रकृति-नारि से सब जग जन्मा, मगर अजन्मा अक्षुण्ण आत्मा।
जीवन में सद् कर्म सुझाता, संस्कृति हित संस्कार बनाता।।
फिर भी मानव द्वेष भाव में, प्रगति चक्र पर फेरे पानी।
कर्त्तव्यों की अजब कहानी, जीवन भर करता नादानी।। 4

के0पी0सत्यम / मौलिक एवं अप्रकाशित

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on May 6, 2015 at 12:47pm

बहुत ही सुन्दर गीत 

दया-करूण की ममता देवी, निश्छल अन्तर्मन की वेदी।
नहीं जरा भी रूक पाती है, करूणा-ममता बरसाती है।।
जीवन भर उल्लास बॉंट कर, पीती सदा नयन से पानी।
कर्त्तव्यो की अजब कहानी, जीवन भर करता नादानी।। 2----इस बंद के तो क्या ही कहने 

बहुत बहुत बधाई लेवल प्रसाद जी 

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on April 29, 2015 at 9:25pm

आ0 जितेंद्र भाई जी,  आपके स्नेह के लिये आपका हार्दिक आभार,  सादर

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on April 27, 2015 at 11:48am

बहुत सुंदर सार्थक प्रस्तुति, आदरणीय केवल जी. बहुत-बहुत बधाई आपको

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