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तन्हाईयों में लौट जाएगी......

तन्हाईयों में लौट जाएगी......

किसको सदायें देते हो
कोई रूह को चुराये जाता है
यादों के खंज़र से
आज खामोशी का दामन
तार- तार हुआ जाता है
हवाओं में
साँसों की सरगोशियों का शोर है
आँखों की मुंडेरों पर
दर्द के मौसम आ बैठे है
धड़कनें ज़ंजीरों में कैद हैं
भला दिल की सदा
कौन सुन पायेगा
ये पत्थरों का शहर है
यहां दिल शीशे सा टूट जायेगा
हर मौसम का यहां
अलग मजाज़ है
हर मौसम अब यहां 
चश्मे सावन में डूब जाएगा
कोई बादे सबा अब
कोई सदा न लाएगी
तन्हाईयों से जो आयी है
तन्हाईयों में लौट जाएगी

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 632

Comment

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Comment by Sushil Sarna on April 30, 2015 at 6:56pm

आदरणीय   डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव  lजी रचना पर आपकी स्नेहिल प्रशंसा का हार्दिक आभार।

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on April 30, 2015 at 1:24pm

बढिया रचना है सरना जी . सादर .

Comment by Sushil Sarna on April 29, 2015 at 2:28pm

आदरणीय   aman kumar  lजी रचना पर आपकी स्नेहिल प्रशंसा का हार्दिक आभार।

Comment by Sushil Sarna on April 29, 2015 at 2:28pm

आदरणीय  Er. Ganesh Jee "Bagi" lजी रचना पर आपकी स्नेहिल प्रशंसा का हार्दिक आभार।

Comment by Sushil Sarna on April 29, 2015 at 2:27pm

आदरणीय  मिथिलेश वामनकर lजी रचना पर आपकी स्नेहिल प्रशंसा का हार्दिक आभार।

Comment by Sushil Sarna on April 29, 2015 at 2:27pm

आदरणीय  Dr. Vijai Shanker lजी रचना पर आपकी स्नेहिल प्रशंसा का हार्दिक आभार। 

Comment by Sushil Sarna on April 29, 2015 at 2:26pm

आदरणीय   shree suneelजी रचना पर आपकी स्नेहिल प्रशंसा का हार्दिक आभार। 

Comment by Sushil Sarna on April 29, 2015 at 2:26pm

आदरणीय  Shyam Narain Verma जी रचना पर आपकी स्नेहिल प्रशंसा का हार्दिक आभार। 

Comment by aman kumar on April 29, 2015 at 8:52am

एक  सुन्दर और भावपूर्ण कविता !@

आभार 


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on April 28, 2015 at 11:00pm

वाह वाह, कविता की खूबसूरती और शब्द विन्यास देखते ही बनता है, सुन्दर अभिव्यक्ति, बहुत बहुत बधाई.

कृपया ध्यान दे...

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