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शब्दों की फरियाद(कविता)

शब्द कुछ मेरे घर फरियाद लेकर आ गये,
भाव लगता गौण,शब्द कोश वाले छा गये।
भावों की लहरें उमड़ा किया करतीं कभी,
अर्थ उनके बाँचते हम कई दफा नहा गये।
बादल नहीं बनाये,जब भर आये तेरे नयन,
हमने तो इतना कहा-घन गगन में छा गये।
या उनके जो खुले केश चाँद पर छाने लगे,
हमने रे इतना कहा-फिर से घन लहरागये
आज हमें ढूँढ-ढूँढ गढ़ रहे सब भाव-रूप,
भावना अचेत पड़ी और हम शरमा गये।
मौलिक व स्वरचित@मनन

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Comment by Dr. Vijai Shanker on May 5, 2015 at 2:51am
भावपूर्ण, सुन्दर प्रस्तुति, बधाई, सादर।
Comment by Manan Kumar singh on May 4, 2015 at 6:03pm

आदरणीय श्याम नारायण जी,मनोज जी आभार आपका , सादर। 

Comment by Shyam Narain Verma on May 4, 2015 at 2:37pm

बहुत सुंदर रचना बधाई आपको 

Comment by मनोज अहसास on May 4, 2015 at 12:58pm
बहुत भाव पूर्ण

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