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" पापा , आपने अगर मुझे बेटी माना है तो मुझे इस अधिकार से कभी वंचित मत कीजियेगा ", विदा होते समय वो उनसे लिपट कर रो पड़ी थी और वहाँ मौज़ूद लोगों की आँखें नम हो गयी थीं ।
वो अपने एकलौते पुत्र को खो बैठे थे जिसकी नयी नयी शादी हुई थी , और हर उस आवाज़ के सामने चट्टान बन कर खड़े हो गए थे जो उनकी बहू को इस हादसे के लिए दोषी ठहरा रहे थे । फिर उन्होंने बहू को धीरे धीरे सँभाला और उसे अपनी बेटी का दर्ज़ा दे दिया । उसके अपने माता पिता भी संतुष्ट थे कि वो अब उस घर की बेटी बन गयी थी ।
आजीवन उनका ध्यान रखने के बाद उनकी अर्थी को अपना कन्धा देकर वो बेटे का फ़र्ज़ भी निभा गयी ।
मौलिक एवम अप्रकाशित

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Comment by विनय कुमार on May 27, 2015 at 9:27pm

आप की टिप्पणी सर माथे पर आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी | शायद कुछ कमी रह गयी इसमें , बहुत बहुत आभार इंगित करने के लिए.


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on May 27, 2015 at 9:07pm

इस लघुकथा के माध्यम से एक अत्य़ंत संवेदनशील विषय को उठाया गया है.

लेकिन आदरणीय, आपका ’टच’ मिलने से रह गया है. यह लघुकथा तनिक और ट्रीटमेण्ट चाहती थी.


आपकी लघुकथाओं से यदि हमारी अपेक्षाएँ बढ़ गयी हैं, तो इसके ’दोषी’ आप ही हैं.
हार्दिक शुभेच्छाएँ.

Comment by विनय कुमार on May 20, 2015 at 12:56pm

बहुत बहुत आभार आदरणीय जितेन्द्र पस्टारिया जी..

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on May 20, 2015 at 12:22am

सुंदर मर्मस्पर्शी लघुकथा ,आदरणीय विनय जी. बहुत-बहुत बधाई आपको

Comment by विनय कुमार on May 19, 2015 at 9:46pm

बहुत बहुत आभार आदरणीया डॉ प्राची सिंह जी | शुक्रिया आपके विचार रखने का , आगे प्रयास रहेगा |

Comment by विनय कुमार on May 19, 2015 at 9:44pm

बहुत बहुत आभार आदरणीय डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव जी..

Comment by विनय कुमार on May 19, 2015 at 9:43pm

बहुत बहुत आभार आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी..

Comment by विनय कुमार on May 19, 2015 at 9:43pm

बहुत बहुत आभार आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी..

Comment by विनय कुमार on May 19, 2015 at 9:42pm

बहुत बहुत आभार आदरणीय शुभ्रांशु पाण्डेय जी..


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on May 19, 2015 at 9:31pm

प्रस्तुति का कथ्य बहुत मार्मिक है आ० विनय कुमार सिंह जी.... पर अंतिम पंक्ति तक पहुँचते पहुँचते ये एक घटना का विवरण सा प्रतीत होती है, लघु कथा के मानक तत्वों के सापेक्ष इसे अभी कुछ और कसावट चाहिए

प्रयास के लिए बहुत बहुत शुभकामनाएं 

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