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नफरतों से जब कोई भर जायेगा 
काम कोई दहशती कर जायेगा 
 
इक गली,इक बाग़ कोई छोड़ दो
एक बच्चा खेल कर घर जायेगा
 
बागबाँ को क्यों खबर होती नहीं
फूल इक अहसास है मर जायेगा
 
रेत के सहरा को कब मालूम है
एक बादल तर-ब-तर कर जायेगा
 
अब यक़ीनन राह भूलेगा कोई
जब कोई यूँ कौम को भरमायेगा
 
काश कोई इन धमाकों को कहे 
नींद में बच्चा कोई डर जायेगा
 
हुक्मरां की चाल तो तफरीह है
फिर किसी प्यादे का ही सर जायेगा  

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Comment

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Comment by ASHVANI KUMAR SHARMA on May 18, 2011 at 6:08pm
ashish ji aap ka shukriya............der se dekh paane ki maafi chahata hun
Comment by आशीष यादव on April 10, 2011 at 11:43pm
baagi ji aap ki is ghazal ki bilkul satik wyakhya ki hai. meri taraf se bhi badhai.
Comment by ASHVANI KUMAR SHARMA on April 10, 2011 at 11:39pm
jarranawazi aap ki.........aap ne bahut hausala badhaya..........atyant abhaari hun

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on April 10, 2011 at 11:56am
नफरतों से जब कोई भर जायेगा 
काम कोई दहशती कर जायेगा .............खुबसूरत मतला , उम्द्दा ख्यालात
 
इक गली,इक बाग़ कोई छोड़ दो
एक बच्चा खेल कर घर जायेगा.............वाह वाह वाह, बेहद नाजुक शे'र, इस दरियादिली को दाद देता हूँ |
 
बागबाँ को क्यों खबर होती नहीं
फूल इक अहसास है मर जायेगा...........एहसास तो महसूस की जाती , जब बागबाँ जालिम हो तो क्या एहसास करेगा, खुबसूरत अभिव्यक्ति |
 
रेत के सहरा को कब मालूम है
एक बादल तर-ब-तर कर जायेगा......वाह वाह , बुलंद ख्याल ,
 
काश कोई इन धमाकों को कहे 
नींद में बच्चा कोई डर जायेगा.........पुनः आत्मा को अन्दर तक झकझोर देने वाला शेर , जितना भी दाद दूँ कम लगता है |
 
हुक्मरां की चाल तो तफरीह है
फिर किसी प्यादे का ही सर जायेगा ....क्या बात कही है साहब , हकीकत से पर्दा हटा दिया, कमोबेश यही सच्चाई है , बहुत बहुत बधाई इस खुबसूरत ग़ज़ल पर |

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