For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

करीबी रिश्तेदार (लघुकथा)

दीनदयाल की विधवा की दस लाख की लॉटरी खुल गयी!घर रिश्तेदारों से भर गया I छोटा दो कमरों का मकान! मॉ बेटी दो प्राणी, दौनों परेशान!

"अम्मा, ये  लोग कौन हैं,और कब तक रहेंगे"!

"बेटी,ऐसे नहीं बोलते, मेहमान हैं,बधाई देने आये है"!

"मैने तो कभी नहीं देखा इनको"!

"ये  तेरे बापू के करीबी रिश्तेदार हैं"!

"अम्मा,दो महिने पहले जब बापू शांत हुए थे, तब तो कोई नहीं आया था"!

  मंदिर  में भज़न बज रहा था,"सुख के सब साथी, दुख में न कोय"!

.

 मौलिक व अप्रकाशित

Views: 597

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by TEJ VEER SINGH on August 23, 2015 at 10:17am
हार्दिक आभार आदरणीय डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव जी!
Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on August 22, 2015 at 4:50pm

सभी इस सत्य को जानते है  पर धोका भी उठाते हैं

Comment by TEJ VEER SINGH on August 21, 2015 at 1:09pm

हार्दिक आभार आदरणीय विजय जी, सीमा जी, कांता जी, आप लोगों ने मेरा उत्साह बढाया, लघुकथा को सराहा!पुनः आभार!

Comment by kanta roy on August 21, 2015 at 8:57am
वाह ! सुख के सब साथी ...... क्या बात कही है आपने आदरणीय तेजवीर सिंह जी .... बहुत ही उम्दा लघुकथा हुई है । बधाई स्वीकार करें ।
Comment by Seema Singh on August 20, 2015 at 4:28pm
वाह बहुत खूब,जीवन की सचचाई को आईना दिखाती कथा के लिए बहुत बधाई आo तेजवीर जी ।
Comment by vijay nikore on August 20, 2015 at 4:13pm

 अति सुन्दर लघुकथा कही है। हार्दिक बधाई।

Comment by TEJ VEER SINGH on August 20, 2015 at 10:43am

आदरणीय सुशील जी, आदरणीया प्रतिभा जी, आपका हार्दिक आभार!लघुकथा के अवलोकन,सराहना हेतु समय निकाला!पुनः हार्दिक आभार!

Comment by pratibha pande on August 19, 2015 at 10:05pm

कडवी सच्चाई ये ही है रिश्तों की , बधाई इस सार्थक रचना के लिए आपको आ०  तेज वीर सिंह जी

Comment by Sushil Sarna on August 19, 2015 at 4:51pm

यथार्थ को उजागर करती भावपूर्ण लघुकथा की प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई आदरणीय। 

Comment by TEJ VEER SINGH on August 19, 2015 at 11:24am

हार्दिक आभार आदरणीय मिथिलेश जी, लघुकथा अवलोकन एवम  सराहना करने हेतु पुनः आभार!

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . रिश्ते
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय "
6 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

तब मनुज देवता हो गया जान लो,- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२१२/२१२/२१२/२१२**अर्थ जो प्रेम का पढ़ सके आदमीएक उन्नत समय गढ़ सके आदमी।१।*आदमीयत जहाँ खूब महफूज होएक…See More
13 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . रिश्ते
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। सुंदर दोहै हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
14 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . रिश्ते

दोहा पंचक. . . . रिश्तेमिलते हैं  ऐसे गले , जैसे हों मजबूर ।निभा रहे संबंध सब , जैसे हो दस्तूर…See More
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन व आभार।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई रवि जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और सुंदर सुझाव के लिए हार्दिक आभार।"
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"बेशक। सच कहा आपने।"
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"मेरा प्रयास आपको अच्छा और प्रेरक लगा। हार्दिक धन्यवाद हौसला अफ़ज़ाई हेतु आदरणीय मनन कुमार सिंह जी।"
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"आदाब।‌ नववर्ष की पहली गोष्ठी में मेरी रचना पर आपकी और जनाब मनन कुमार सिंह जी की टिप्पणियों और…"
yesterday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"प्रेरक रचना।मार्ग दिखाती हुई भी। आज के समय की सच्चाई उजागर करती हुई। बधाइयाँ लीजिये, आदरणीय उस्मानी…"
yesterday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"दिली आभार आदरणीया प्रतिभा जी। "
Saturday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"हार्दिक आभार आदरणीय उस्मानी जी। "
Saturday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service