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करीबी रिश्तेदार (लघुकथा)

दीनदयाल की विधवा की दस लाख की लॉटरी खुल गयी!घर रिश्तेदारों से भर गया I छोटा दो कमरों का मकान! मॉ बेटी दो प्राणी, दौनों परेशान!

"अम्मा, ये  लोग कौन हैं,और कब तक रहेंगे"!

"बेटी,ऐसे नहीं बोलते, मेहमान हैं,बधाई देने आये है"!

"मैने तो कभी नहीं देखा इनको"!

"ये  तेरे बापू के करीबी रिश्तेदार हैं"!

"अम्मा,दो महिने पहले जब बापू शांत हुए थे, तब तो कोई नहीं आया था"!

  मंदिर  में भज़न बज रहा था,"सुख के सब साथी, दुख में न कोय"!

.

 मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by TEJ VEER SINGH on August 23, 2015 at 10:17am
हार्दिक आभार आदरणीय डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव जी!
Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on August 22, 2015 at 4:50pm

सभी इस सत्य को जानते है  पर धोका भी उठाते हैं

Comment by TEJ VEER SINGH on August 21, 2015 at 1:09pm

हार्दिक आभार आदरणीय विजय जी, सीमा जी, कांता जी, आप लोगों ने मेरा उत्साह बढाया, लघुकथा को सराहा!पुनः आभार!

Comment by kanta roy on August 21, 2015 at 8:57am
वाह ! सुख के सब साथी ...... क्या बात कही है आपने आदरणीय तेजवीर सिंह जी .... बहुत ही उम्दा लघुकथा हुई है । बधाई स्वीकार करें ।
Comment by Seema Singh on August 20, 2015 at 4:28pm
वाह बहुत खूब,जीवन की सचचाई को आईना दिखाती कथा के लिए बहुत बधाई आo तेजवीर जी ।
Comment by vijay nikore on August 20, 2015 at 4:13pm

 अति सुन्दर लघुकथा कही है। हार्दिक बधाई।

Comment by TEJ VEER SINGH on August 20, 2015 at 10:43am

आदरणीय सुशील जी, आदरणीया प्रतिभा जी, आपका हार्दिक आभार!लघुकथा के अवलोकन,सराहना हेतु समय निकाला!पुनः हार्दिक आभार!

Comment by pratibha pande on August 19, 2015 at 10:05pm

कडवी सच्चाई ये ही है रिश्तों की , बधाई इस सार्थक रचना के लिए आपको आ०  तेज वीर सिंह जी

Comment by Sushil Sarna on August 19, 2015 at 4:51pm

यथार्थ को उजागर करती भावपूर्ण लघुकथा की प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई आदरणीय। 

Comment by TEJ VEER SINGH on August 19, 2015 at 11:24am

हार्दिक आभार आदरणीय मिथिलेश जी, लघुकथा अवलोकन एवम  सराहना करने हेतु पुनः आभार!

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