For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

दुनिया बिलकुल छोटी है (ग़ज़ल) -- मिथिलेश वामनकर

22---22---22---2

 

फूलों में सरगोशी है

सच की खुशबू फैली है

 

मुमकिन को भी मायूसी

नामुमकिन कर देती है

 

चलती है बस ताकत की

लागर तो फरयादी है

 

मेरी जाँ की दुश्मन भी

मेरी ही नादानी है

 

मत पूछो क्या ग़ज़लों में ?

ये दुनिया ही दूजी है

 

मैंने पूछा कैसी हो ?

जाने माँ क्यों रोती है

 

सूरत में आवाजें हैं

सीरत में ख़ामोशी है

 

ख़्वाब मुफ़स्सल है लेकिन

दुनिया बिलकुल छोटी है

 

------------------------------------------------------------

(मौलिक व अप्रकाशित)  © मिथिलेश वामनकर

------------------------------------------------------------

Views: 779

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on December 25, 2015 at 4:23am

आदरणीय सुनील जी,ग़ज़ल की सराहना और उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार, बहुत बहुत धन्यवाद. 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on December 25, 2015 at 4:23am

आदरणीय गुमनाम जी, ग़ज़ल की सराहना और उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार, बहुत बहुत धन्यवाद. 

Comment by shree suneel on August 30, 2015 at 10:23am
छोटी बह्र में बङी बात अँटा गये.. . बहुत ख़ूब हुई है ग़ज़ल.
मैंने पूछा कैसी हो ?
जाने माँ क्यों रोती है...
बधाई लें आदरणीय मिथलेश वामनकर सर जी. सादर.
Comment by gumnaam pithoragarhi on August 29, 2015 at 1:57pm

वाह खूब है ,,,,,,,,,,,


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on August 28, 2015 at 1:05am

आदरणीय बड़े भाई धर्मेन्द्र जी सराहना हेतु आभार. आपने सही कहा. आपकी इस्लाह अनुसार संशोधन कर रहा हूँ. सादर 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on August 28, 2015 at 1:04am

आदरणीया राजेश दीदी ग़ज़ल की सराहना के लिए हार्दिक आभार. नमन 

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on August 27, 2015 at 9:19pm

अच्छे अश’आर हुए हैं आदरणीय मिथिलेश जी। एक वचन, बहुवचन के चक्कर में कई अश’आर गड़बड़ा रहे हैं।

दुनिया बिलकुल छोटी है

खुशियाँ वापिस मिलती है / हैं

 

खुशियाँ वापिस मिलती है / हैं

आखिर गम की बेटी है / हैं

 

माज़ी चाहे जैसा हो

यादें प्यारी लगती है / हैं

सुझाव ये है कि इसे दो ग़ज़लों में बाँट दीजिए। एकवचन वाली अलग और बहुवचन वाली अलग। तीन शे’र तो यही हो जाएँगें। सादर


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on August 27, 2015 at 1:00pm

मिथिलेश भैया ,छोटी बह्र पर आपकी ग़ज़ल पहली बार देख रही हूँ ग़ज़ल अच्छी है जो मैं ध्यान दिलाना चाहती थी दिनेश भैया कह चुके उसे निःसंदेह आप दुरुस्त कर ही लेंगे बहुत बहुत बधाई 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on August 26, 2015 at 2:22pm

आदरणीय रवि जी, ग़ज़ल की सराहना और उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लिए आभार. आपने सही कहा कि अपने कम्फर्ट ज़ोन से बाहर निकलकर ये प्रयास किया है. ये पूरी ग़ज़ल एक बार में लिखी है. वैसे  तो ताज़ी ग़ज़ल लेकिन अंदाज़े-बयां पुराना है. शायद .. पुनः प्रयास करता हूँ. छोटी बह्र का बिलकुल नया अभ्यासी हूँ. सचेत करने के लिए हार्दिक आभार 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on August 26, 2015 at 2:19pm

आदरणीय हर्ष जी ग़ज़ल की सराहना और उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लिए आभार.

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185

आदरणीय साहित्य प्रेमियो,जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
32 minutes ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद ' जी सादर अभिवादन प्रथम तो मैं क्षमाप्रार्थी हूँ देरी से आने की…"
12 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा दशम. . . . . उम्र

दोहा दशम् . . . . उम्रठहरी- ठहरी उम्र अब, करती एक सवाल ।कहाँ गई जब जिंदगी, रहती थी खुशहाल ।।यादों…See More
yesterday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय Jaihind Raipuri साहिब, नमस्कार। बढ़िया ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार करें। /ये मेरा…"
Friday
आशीष यादव added a discussion to the group धार्मिक साहित्य
Thumbnail

चल मन अब गोकुल के धाम

चल मन अब गोकुल के धाम अद्भुत मनहर बाल रूप में मिल जाएंगे श्याम कि चल मन अब……………………….कटि करधनी शीश…See More
Friday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अशोक भाईजी धन्यवाद ... मेरा प्रयास  सफल हुआ।"
Mar 31
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"वाह वाह वाह !!! बहुत दिनों बाद ऐसी लाजवाब प्रतिक्रिया पढने में आई है। कांउटर अटैक ॥ हजारों धन्यवाद…"
Mar 31
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"  आदरणीय शेख शाहज़ाद उस्मानी जी सादर, सरकारी शालाओं की गलत परम्परा की ओर ध्यान आकृष्ट कराती…"
Mar 31
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"सार्थक है आपका सुझाव "
Mar 31
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदाब।‌ रचना पटल पर उपस्थिति और समीक्षाओं हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीया प्रतिभा पाण्डेय जी। मेरी…"
Mar 31
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"हार्दिक धन्यवाद आदरणीया प्रतिभाजी ।  इसमें कुछ कमी हो सकती है लेकिन इस प्रकार के आयोजन शहरों…"
Mar 31
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब सादर, बिना सोचे बोलने के परिणाम पर सुन्दर और संतुलित लघुकथा…"
Mar 31

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service