For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

2122 2112
आ रहा है साल नया
जा रहा है काल बचा।
तिक्त-मीठी बात रही
है सपन का जाल रचा।
अनसुनापन बोल रहा
लेख दुर्गम भाल खचा।
कर जतन मन डोल रहा
देख अब ढाढस न बचा।
थे चले उम्मीद लिये
दे गया गत साल गचा।
नाच आये थिर न हुए
मन कहा अब न नचा।
कह रहा है साल नवल
देख मेरी शान बचा।
लाज लुटती चूक गये
मैं सकूँ इसको न पचा।
चीर जोड़ो,गर न सको
बलि चढ़ो नर न लजा।
शांत रहने दे न मुझे
रक्त से दामन न सजा।
मच रही है धूम अभी
अब चलो कुछ प्यार लुटा।
मौलिक व अप्रकाशित@मनन

Views: 383

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Manan Kumar singh on December 25, 2015 at 11:03am
आभार आपका लक्ष्मण जी
Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on December 25, 2015 at 7:22am

इस सुन्दर प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई

Comment by Manan Kumar singh on December 24, 2015 at 9:46pm
भाई सुशिल जी,आपका आभार।
Comment by Manan Kumar singh on December 24, 2015 at 9:45pm
जनाब समर जी,शुक्रिया आपका।
Comment by Sushil Sarna on December 24, 2015 at 7:58pm

शांत रहने दे न मुझे
रक्त से दामन न सजा।
मच रही है धूम अभी
अब चलो कुछ प्यार लुटा।

वाह बहुत सुंदर भावाभिव्यक्ति आदरणीय ... हार्दिक बधाई

Comment by Samar kabeer on December 24, 2015 at 5:16pm
जनाब मनन कुमार जी आदाब,इस प्रस्तुति के लिये बधाई आपको|

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, प्रोत्साहन के लिए हार्दिक आभार।"
26 seconds ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आ. रिचा जी, हार्दिक धन्यवाद।"
1 minute ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आ. भाई अजय जी, गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए आभार।"
2 minutes ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय अजय गुप्ता जी, सुंदर ग़जल के लिए बधाई स्वीकार करें।"
4 minutes ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय तिलकराज कपूर जी, आपका सुझाव उचित है। इसे ठीक कर लूंगा। आपकी टिप्पणी व सुझाव के लिए हादिक्…"
8 minutes ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"शुक्रिया मेरे भाई "
1 hour ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"बहुत बहुत आभार आदरणीय। आप सब से सकारात्मक प्रतिक्रिया और प्रयास करने को प्रेरित करती…"
1 hour ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आभार ऋचा जी "
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आ. भाई अजय जी, अभिवादन। बेहतरीन गजल हुई है। हार्दिक बधाई।"
7 hours ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"शानदार ग़ज़ल हुई। "
12 hours ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"इसे एक बार देख लें वो (जो) बुलाती रही उसे दिलबर भूख मारे उसी को भूल गया (भूख में वो उसी को भूल गया)"
12 hours ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"कुछ सुझावबाप ख़ुद की ख़ुशी को भूल गया आज बेटा उसी को भूल गया १ (शेर को अभी और स्पष्ट किया जा सकता…"
12 hours ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service